-निर्विरोध चुनाव के लिए दबाव
-धनबल का बेशुमार इस्तेमाल
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में स्थानीय निकायों के चुनावों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नीति को पूरी तरह कुचल दिया गया है। मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने लोकतंत्र को समेटकर रख दिया है और पैसों का खुला खेल शुरू हो गया है। मतदान से पहले ही हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। भाजपा महायुति की सत्ता की भूख लोकतंत्र को निगलने तक पहुंच गई है। मनपा चुनावों में ‘बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया’ का तमाशा खुलेआम चल रहा है। ऐसा तीखा हमला प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि चुनाव कोई नई बात नहीं है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष का भी उतना ही महत्व होता है, जितना सत्ताधारी पक्ष का। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में छह गैर-कांग्रेस मंत्री थे। यही हमारी संस्कृति और परंपरा रही है। लेकिन अब भाजपा और महायुति की मानसिकता ‘विपक्ष ही नहीं चाहिए’ जैसी बन गई है और इसी वजह से सत्ताधारी निर्विरोध चुनाव के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं। विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने देना, धमकियां देना, दबाव की राजनीति करना, पुलिस और प्रशासन की मदद से बेशर्मी भरा खेल खेला जा रहा है और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना हुआ है। कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करती है। लोकतंत्र में संविधान द्वारा दिए गए मतदान के अधिकार के तहत ‘नोटा’ का विकल्प भी है इसलिए जहां निर्विरोध स्थिति बनाई जा रही है, वहां मतदाताओं को नोटा का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
राहुल नार्वेकर को हटाओ
संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा होती है कि वह राजनीतिक द्वेष से ऊपर उठकर व्यवहार करे। लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति, राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, ये सभी संवैधानिक पद हैं और उनका सम्मान किया जाता है। लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्हें तत्काल पद से हटा देना चाहिए। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने दलबदल विरोधी कानून को कमजोर कर लोकतंत्र और संविधान की छाती में खंजर घोंपने का काम किया, इसी कारण उन्हें दूसरी बार मौका दिया गया। अब ये महोदय महानगरपालिका चुनावों में अपने रिश्तेदारों के लिए बेहद निम्न स्तर तक उतर आए हैं।
धमकी देकर पद का दुरुपयोग
विपक्ष को नामांकन दाखिल करने से रोकना, धमकियां देना और पद का दुरुपयोग करना जैसे गंभीर कृत्य राहुल नार्वेकर ने किए हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। सपकाल ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति को इस मामले में गंभीर दखल लेकर राहुल नार्वेकर को पद से बर्खास्त करना चाहिए।
