शीतल अवस्थी
माघ मेला देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों में मनाया जाता है। खासकर प्रयाग, हरिद्वार, उत्तरकाशी का माघ मेला। प्रयाग का माघ मेला तथा स्नान प्रसिद्ध है। ब्रह्मॢा जी ने इसे तीर्थराज कहा है क्योंकि उन्होंने स्वयं यज्ञ संपन्न किया था। वेदों, रामायण तथा महाभारत जैसे महाकाव्यों और पुराणों में भी इसके महत्व की व्याख्या है। इसके सामरिक महत्व के कारण ही मुगल सम्राट अकबर ने पवित्र संगम के किनारे एक भव्य किले का निर्माण कराया था।
प्रयाग का विश्व प्रसिद्ध माघ मेला मकर संक्रांति से आरंभ होकर महाशिवरात्रि को संपन्न होता है। अत: माघ मास स्नान, दान, जप-तप जहां अक्षय फलदायी है, वहां सभी पापों से मुक्ति का एकमात्र साधन हैं। माघ मास में जल कहीं भी हो, गंगाजल के समान होता है। फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा ही महत्व है। नित्यप्रति स्नान दानादि करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। माघ मास के स्नान का प्रारंभ पौष मास की पूर्णिमा से होता है।
