सूरज सिंह
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और फिल्म इंडस्ट्री के बीच एक समय ऐसा खौफनाक दौर था, जब डर और दबाव के सहारे पैâसले लिए जाते थे। यह कहानी उसी दौर की है, जब अंडरवर्ल्ड का नाम सुनते ही बड़े-बड़े लोग खामोश हो जाते थे। एक ऐसा ही मामला सामने आया, जब बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजीत दीवानी को ‘हेडशॉट’ देने का फरमान जारी किया गया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी थी।
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और फिल्म इंडस्ट्री का रिश्ता हमेशा से विवादों और रहस्यों से भरा रहा है। एक समय ऐसा भी था जब अंडरवर्ल्ड के कुछ बड़े नाम बॉलीवुड में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। इन्हीं नामों में से एक था अबू सलेम, जो कथित तौर पर फिल्म उद्योग में दखल बढ़ाना चाहता था। बताया जाता है कि जब उसे बॉलीवुड में अपनी पकड़ बनाने की जिम्मेदारी दी गई, तब उसकी कोशिश थी कि इंडस्ट्री के बड़े कलाकार और निर्माता उसके प्रभाव में आ जाएं। उस दौर में मनीषा कोइराला शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। कहानी के अनुसार, अबू सलेम ने मनीषा कोइराला से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सीधा संपर्क संभव नहीं हो सका। उसके पास उनका निजी नंबर नहीं था, इसलिए उसने उनके सचिव अजीत दीवानी से संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, जब बार-बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तो यह बात अंडरवर्ल्ड के लिए ‘अनदेखी’ या ‘अपमान’ के रूप में ली गई। उस समय अंडरवर्ल्ड में डर और दबाव बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। कहा जाता है कि इसी गुस्से और शक्ति प्रदर्शन के चलते एक खौफनाक आदेश जारी किया गया ‘हेडशॉट’। अंडरवर्ल्ड की भाषा में ‘हेडशॉट’ का मतलब होता है ऐसा हमला, जिसमें लक्ष्य के बचने की कोई संभावना नहीं रहती। यह न सिर्फ एक हत्या होती थी, बल्कि एक संदेश भी होता था- दूसरों को डराने और अपनी ताकत दिखाने के लिए।
इसी आदेश के तहत अजीत दीवानी की हत्या कर दी गई। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि पूरे फिल्म उद्योग के लिए एक चेतावनी थी कि अंडरवर्ल्ड के आदेशों को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
