रोहित माहेश्वरी, लखनऊ
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सांसद रवि किशन की एक कथित टिप्पणी को लेकर उन पर तंज कसते हुए कहा कि ‘सांसद जनता का प्रतिनिधि होता है, मुख्यमंत्री का खिलौना नहीं। यह भाजपा सरकार है या सर्कस?’ दरअसल, रवि किशन ने खुद को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘स्ट्रेस बस्टर’ (तनाव दूर करने वाला) बताया था, जिसे लेकर कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। सपा प्रमुख ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधते हुए उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया और उस पर जनता के मुद्दों के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा, ‘उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता दुख-दर्द-दिक्कतों का सामना कर रही है और भाजपा सरकार के लोग आपस में विदूषक-विदूषक के खेल का आनंद ले रहे हैं।’
शौकत को पढ़ाया इतिहास का पाठ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महाराजा सुहेलदेव की तारीफ करने के एक दिन बाद ही एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने विवादित बयान दे दिया है। शौकत अली ने ट्वीट करते हुए कहा कि महाराजा सुहेलदेव का भारत की आजादी में कोई योगदान नहीं था। उनके इस बयान पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रवक्ता अरुण राजभर भड़क उठे हैं। अरुण राजभर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि शौकत अली को इतिहास की जानकारी नहीं है और वह अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस तरह के विवादित बयान दे रहे हैं। राजभर ने कहा कि वह देश के खलनायकों को राष्ट्रनायक बनाना चाहते हैं। भारत की रक्षा करने वाले ५८५ राजाओं में १६५ राजा, राजभर समाज से थे, जिन्होंने इस देश की संस्कृति को बचाया। आज जब लोग इस इतिहास को जान रहे हैं, तो शौकत अली जैसे नेताओं को परेशानी हो रही है।
महिला जनगणना पर अखिलेश यादव का निशाना
यूपी के पूर्व सीएम और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि अगर गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण वैâसे सही होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक-तिहाई है तो यह पूरी तरह गणित का विषय है और गणित का आधार सटीक आंकड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि २०११ की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर महिला आरक्षण तय करना गलत है। यादव ने आरोप लगाया कि जो सरकार महिलाओं की सही गिनती नहीं करना चाहती, वह उन्हें वास्तविक अधिकार भी नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ किसी भी तरह का छलावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जब तक नई जनगणना नहीं होती, तब तक महिला आरक्षण पर बहस करना भी उचित नहीं है।
