सामना संवाददाता / मुंबई
कथित भोंदू बाबा अशोक खरात द्वारा महिलाओं के शोषण के मामले में किसी भी पीड़िता ने पुलिस या जनप्रतिनिधियों के पास न्याय के लिए जाने की हिम्मत क्यों नहीं की? यह सवाल राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में व्यवस्था के रूप में हम सभी कहीं न कहीं असफल रहे हैं। वे सोमवार को मीडिया से बातचीत कर रही थीं। सुले ने कहा कि खरात के ऑफिस में बेहद आपत्तिजनक गतिविधियां चल रही थीं और अब इस मामले में हवाला का एंगल भी सामने आया है। एक भोंदू बाबा इतने बड़े स्तर पर क्या-क्या कर रहा था, यह भगवान ही जानता है। इस पूरे प्रकरण में सत्ता से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं इसलिए बिना किसी दबाव के और बिना राजनीति किए इस मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए और महाराष्ट्र की छवि को धूमिल करने वाली ऐसी घटनाएं रोकी जानी चाहिए।
सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि यह चिंताजनक है कि शोषण झेल रही महिलाओं को यह विश्वास नहीं हुआ कि वे किसी के पास जाकर न्याय मांग सकती हैं। क्या इसका मतलब यह है कि व्यवस्था और उसमें काम करने वाले लोग असफल हो गए हैं? कुछ लोगों का कहना है कि खरात के पास बड़े-बड़े राजनीतिक नेता आते थे, इसलिए पीड़िताओं को लगता था कि उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, यह बहुत खतरनाक स्थिति है।
