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भीषण गर्मी में दूध संकट गहराया… मिलावट माफिया सक्रिय होने का खतरा…मुंबई में रोज दो लाख लीटर की कमी

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में इस बार की भीषण गर्मी ने दूध उत्पादन पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। मुंबई, ठाणे समेत राज्य के कई हिस्सों में दूध संकलन में रोजाना एक से दो लाख लीटर तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। चारे की कमी, पानी का संकट और बढ़ती गर्मी ने डेयरी सेक्टर को दबाव में ला दिया है, जिससे आने वाले दिनों में दूध संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
डेयरी विशेषज्ञों के मुताबिक, दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा और पर्याप्त पानी बेहद जरूरी होता है, लेकिन गर्मी के कारण दोनों की भारी कमी हो गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी सप्लाई चेन तक इसकी मार दिखने लगी है। स्थिति को और गंभीर बना रही है परराज्यों से आने वाले दुधारू पशुओं की घटती आवक। हरियाणा जैसे राज्यों से बड़े पैमाने पर पशु खरीदे जाते थे, जिससे गर्मियों में भी सप्लाई संतुलित रहती थी। लेकिन इस साल यह सिलसिला धीमा पड़ गया है, जिससे दूध की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव बना है। फिलहाल बाजार में दूध के दाम स्थिर बताए जा रहे हैं—गाय का दूध ४५ से ३९ रुपए और भैंस का दूध ६० से ८० रुपए प्रति लीटर के आसपास है। लेकिन उत्पादन में गिरावट जारी रही तो कीमतों में उछाल से इनकार नहीं किया जा सकता। इस संकट के बीच एक और खतरनाक पहलू सामने आ रहा है—मिलावट का बढ़ता खतरा। जानकारों का कहना है कि जब भी बाजार में दूध की कमी होती है, तब नकली दूध बनाने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। यूरिया, केमिकल और सिंथेटिक पदार्थों से तैयार ‘नकली दूध’ बाजार में खपाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। वहीं, दूध पाउडर उत्पादन में भी १० से १५ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। निजी डेयरियां आमतौर पर रोजाना लाखों लीटर दूध पाउडर बनाने में इस्तेमाल करती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले दो महीनों में बारिश से पहले हालात नहीं सुधरे, तो महाराष्ट्र में दूध संकट और गहरा सकता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन के लिए यह दोहरी चुनौती है—एक तरफ उत्पादन बढ़ाने के उपाय करना और दूसरी तरफ मिलावट माफिया पर सख्त कार्रवाई करना।

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