एम. एम. एस.
मुंबई और नई मुंबई के इलाकों में यात्रा करते समय ऊबड़-खाबड़ सड़कें अब केवल यात्रा की बाधा नहीं रह गई हैं, बल्कि एक गंभीर समस्या बन गई हैं। मानसून के बाद होने वाले गड्ढे और घटिया दर्जे के पैचवर्क के कारण सड़कों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि यात्रियों को शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या के मुख्य पहलुओं पर गौर करें-
स्वास्थ्य पर प्रभाव: लगातार खराब सड़कों पर चलने के कारण दुपहिया वाहन चालकों और ऑटो यात्रियों को पीठदर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्याओं और गर्दन के दर्द ने घेर लिया है। झटकों की वजह से स्लिप डिस्क जैसी गंभीर बीमारियां होने का प्रमाण बढ़ गया है।
वाहनों का नुकसान: असमतल सड़कों के कारण गाड़ियों के सस्पेंशन पर भारी दबाव पड़ता है। टायरों का घिसना, अलाइनमेंट बिगड़ना और र्इंधन की अधिक खपत के कारण आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ता है।
यातायात की गति और जाम: सड़कें ठीक न होने के कारण वाहनों की गति अपने आप कम हो जाती है। इससे नई मुंबई के सायन-पनवेल राजमार्ग या मुंबई की आंतरिक सड़कों पर लंबी कतारें लग जाती हैं। यात्रा का समय दोगुना होने से काम की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
दुर्घटनाओं का डर: सड़क पर अचानक आने वाले उभार या गड्ढों से बचने की कोशिश में अक्सर वाहन आपस में टकरा जाते हैं। रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने पर ये सड़कें जानलेवा साबित हो सकती हैं।
मुख्य वजह क्या है?
सड़क निर्माण का घटिया स्तर और सरकारी व प्रशासनिक लापरवाही, जिसके चलते सड़क निर्माण का घटिया स्तर। अक्सर गड्ढों को भरने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री टिकती नहीं है। कोल्ड मिक्स या अस्थायी पैचवर्क कुछ ही दिनों में उखड़ जाता है और सड़क फिर से वैसी ही हो जाती है। तकनीकी नियोजन का अभाव और ठेकेदारों की लापरवाही इसके मुख्य कारण माने जाते हैं।
क्या उपाय होने चाहिए?
तकनीकी ऑडिट: सड़कों के निर्माण और मरम्मत के दौरान आईआईटी जैसी संस्थाओं से तकनीकी ऑडिट कराया जाना चाहिए।
कठोर दंड: घटिया काम करने वाले ठेकेदारों पर न केवल जुर्माना लगाया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाना चाहिए।
डिजिटल शिकायत निवारण: महानगरपालिका को नागरिकों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने वाली एक पारदर्शी प्रणाली को और अधिक सक्षम बनाना चाहिए। खराब सड़कें केवल महानगरपालिका का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों के जीवन स्तर के अधिकार से जुड़ा विषय है। सरकार और प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी धकेलकर नागरिकों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकती।
