सुनील ओसवाल / मुंबई
शिंदे गुट के भीतर सुलग रही कलह अब खुली बगावत का रूप लेने लगी है। मराठवाड़ा दौरे पर निकले सांसद श्रीकांत शिंदे के सामने ही हिंगोली के विधायक संतोष बांगर ने जिस तीखे अंदाज में अपने ही मंत्रियों पर हमला बोला, उसने पार्टी के अंदर मचे सियासी भूचाल को उजागर कर दिया है।
नांदेड में आयोजित पदाधिकारी सम्मेलन में बांगर ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ मंत्रियों के सिर पर सत्ता का नशा चढ़ गया है। कार्यकर्ताओं के फोन तक नहीं उठाते। ऐसे लोगों को सीधे घर बैठा देना चाहिए। यह बयान महज नाराजगी नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर बढ़ती दूरी और असंतोष की तीखी अभिव्यक्ति माना जा रहा है। बांगर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि ऊंट पर बैठकर बकरियां हांकने वाले मंत्री जनता और कार्यकर्ताओं के किसी काम के नहीं हैं। सबसे ज्यादा चौंकानेवाली बात यह रही कि इस दौरान मंत्री गुलाबराव पाटील मंच पर उनके ठीक बगल में बैठे थे। ऐसे में बांगर का बयान और भी ज्यादा सियासी मायने रखता है। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इशारों ने कई मंत्रियों को कटघरे में खड़ा कर दिया। दरअसल, मराठवाड़ा में पहले से ही शिंदे गुट के खिलाफ नाराजगी उभर रही थी। छत्रपति संभाजीनगर में पालकमंत्री संजय शिरसाट और नांदेड में आमदार बालाजी कल्याणकर के खिलाफ कार्यकर्ताओं का रोष सामने आ चुका है। अब बांगर के बयान ने यह साफ कर दिया है कि यह असंतोष अब दबा हुआ नहीं, बल्कि खुलकर फूट रहा है।
कार्यकर्ताओं से दूरी नेताओं को पड़ेगी भारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता मिलने के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी बनाना कई नेताओं को भारी पड़ सकती है। फोन न उठाने और समय न देने जैसे मुद्दे छोटे जरूर दिखते हैं, लेकिन यही असंतोष धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक संकट में बदलता है। श्रीकांत शिंदे के सामने ही इस तरह की तल्खी सामने आना यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह असंतोष यहीं थमेगा या आनेवाले दिनों में और बड़े सियासी विस्फोट की वजह बनेगा।
