सूफी खान
ईरान-अमेरिका के बीच दोबारा जंग की आशंका के बादल कुछ हद तक छंट रहे हैं। खबर ये आ रही है कि अमेरिका और ईरान जल्द ही दूसरे दौर की बातचीत शुरु कर सकते हैं। हालांकि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लाकेड की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन ईरान की नेवी के आगे उसे नतीजे हासिल नहीं हो पा रहे हैं। लेकिन अंदर खाने जो कवायद चल रही है वो ये है कि दोनों देश अगले सप्ताह मौजूदा युद्धविराम के समाप्त होने से पहले एक समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि दो हफ्तों का सीजफायर अगले हफ्ते खत्म हो जाएगा। ऐसे में दोनों फिर आमने सामने बैठकर बात करने पर संजीदगी से कोशिश कर रहे हैं। इस्लामाबाद टॉक की तरह इस बार भी इनके टॉप के लोग मिलेंगे या फिर इस बार ऑफिसर लेबल के नुमांइदों के बीच बात होगी।
पिछली बार तो अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट और ईरान के पार्लियामेंट के अध्यक्ष और विदेश मंत्री मिले थे। अगर ईरान अमेरिका फिर बातचीत करने वाले हैं तो ये दुनिया के लिए एक बहुत अच्छी खबर है कि जंग के बादल छंट जाएंगे। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच अगले दौर की बातचीत जल्द ही होने की उम्मीद है। पिछले शनिवार को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच २१ घंटे तक चली बातचीत १९७९ के बाद अपनी तरह की पहली ऐसी बातचीत थी, जिसमें दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि कोई बहुत सकारात्मक नतीजा नहीं मिला,लेकिन पॉजिटिव बात ये है कि दोनों फिर टेबल पर बैठेंगे। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद बातचीत को लेकर ये दावा किया है कि ये बातचीत संतोषजनक रही है इसमें कोई ऐसी बात सामने नही आई जो परेशान करने वाली हो। इधर स्ट्रेट ऑफ हुर्मुज पर भी कोई खास आक्रामकता नहीं दिखी दोनों तरफ से। इसे देखते हुए ये बात पुख्ता होती जा रही है कि दोनों देश फिर बैठेंगे अपनी- अपनी शिकवा शिकायतों के साथ। एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसा होना ही दुनिया के हित में है। व ईरान और अमेरिका भी भले ही शर्तों पर अड़े हैं लेकिन बैकडोर बात की गुंजाइश होना बताता है कि दोनों में से कोई भी अब जंग नहीं चाहता और दुनिया के दूसरे देश तो बिल्कुल भी नहीं सिवाय इजरायल को छोड़कर। करीब ४० दिनों की जंग ने दुनिया को हिला दिया। तेल गैस और दूसरे सामानों की किल्लत शुरु हो गई। ईरान की मार से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकाने और इजरायल के शहरों का बुरा हाल हुआ। नुकसान ईरान को भी उठाना पड़ा, वहां भी बड़ी जनहानि हुई है।
