द्रुप्ति झा / मुंबई
सड़कों के कंक्रीटीकरण करने का काम कई जगहों पर महीनों से अधूरा पड़ा है, जिससे यात्रियों को आवाजाही में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदारों द्वारा कई मुख्य सड़कों के कुछ हिस्सों को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे नागरिकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। सड़कों पर लोगों के लिए चलने तक की जगह नहीं बची है। इस तरह के अधूरे काम के कारण सड़कों के स्थायित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। धीमी गति से काम होने के कारण हर बार कंक्रीटीकरण की परियोजना अधूरी रह जाती है। यदि काम पूरा भी किया जाता है, तो कुछ ही दिनों बाद सड़कों पर दरारें पड़ने लगती हैं। इसका कारण सही तरीके से ‘कंक्रीट क्योरिग्ां’ (तराई) न होना और समय पर पानी न मिलना बताया जा रहा है, जिससे कंक्रीट कमजोर हो जाती है।
अंधेरी के मरोल इलाके में सेवनहिल्स अस्पताल के पास सड़कों का निर्माण कार्य महीनों से जारी है। कंक्रीटीकरण का काम अधूरा होने के कारण सुबह से शाम तक वहां ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। फिलहाल मनपा ने सड़कों के कंक्रीटीकरण को लेकर कुछ कदम उठाए हैं। सड़कों का कंक्रीटीकरण के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। यह डामर (एस्फाल्ट) सड़कों से सीमेंट-कंक्रीट सड़कों की ओर बढ़ने की मुहिम का अगला चरण है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार इस चरण के लिए टेंडर जारी करने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। भारी वित्तीय खर्च को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर अभी चर्चा जारी है। बुधवार को बोरीवली की छह सड़कों (जिनमें अधिकतर अंदरूनी सड़कें हैं) को कंक्रीट सड़कों में बदलने के लिए ६२.५० करोड़ रुपये के टेंडर आमंत्रित किए गए। यह नया रोडमैप मनपा की ‘गड्ढा-मुक्त सड़क परियोजना’ पर आधारित है, जिसे वर्ष २०२२ में शुरू किया गया था। इसके तहत ६९१.४१ किलोमीटर सड़कों को कवर करने के लिए १५,००० करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
९ मीटर से कम चौड़ी सड़कों का नहीं होगा कंक्रीटीकरण
अब तक ३४८.४५ किलोमीटर सड़कों का कंक्रीटीकरण चुका है, जबकि १६८.७१ किलोमीटर सड़कों पर काम जारी है। इसके अलावा ९९.४९ किलोमीटर सड़कों पर काम शुरू होना अभी बाकी है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अगले चरण की योजना बनने के बावजूद काफी काम अभी अधूरा है। मनपा ने निर्णय लिया है कि ९ मीटर से कम चौड़ी सड़कों का कंक्रीटीकरण नहीं किया जाएगा। इसका कारण यह बताया गया है कि कुछ इलाकों में छोटे-मोटे कार्यों को लेकर स्थानीय निवासियों का विरोध सामने आता है।
