– मंत्रियों तक पहुंच पर लगा पहरा
– लोगों में बढ़ा असंतोष, उठे सवाल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मंत्रालय में बढ़ती भीड़ पर लगाम लगाने के नाम पर महायुति सरकार का नया फरमान आया है। अब सीएम की अनुमति मिलने के बाद ही मंत्रालय में ‘एंट्री’ मिलेगी।
अब मामला सीधे ‘नो एक्सेस’ की नीति में बदलता नजर आ रहा है। मंत्रियों तक पहुंच पर कड़े प्रतिबंध, मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति के बिना प्रवेश पर रोक और कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों की आवाजाही पर पहरा वाले इन पैâसलों ने सत्ता और जनता के बीच की दूरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंत्रालय में मिलेगी सिर्फ एक आदमी को आने की छूट!
मंत्रालय में बाहरी भीड़ को रोकने के लिए सरकार ने नया फरमान जारी किया है। अब सीएम की अनुमति के बाद ही बाहरी लोगों को प्रवेश मिलेगा। महायुति सरकार जहां इसे प्रशासनिक अनुशासन का कदम बता रही है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे संवाद खत्म करने और पहुंच सीमित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वैâबिनेट की बैठक के दिन मंत्रियों के साथ सिर्फ एक व्यक्ति को प्रवेश देने और किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति अनिवार्य करने के निर्णय ने सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है।
आलोचकों का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक सुधार कम और जनता तथा कार्यकर्ताओं की पहुंच सीमित करने की कोशिश ज्यादा लगता है। वहीं, सरकार का तर्क है कि मंत्रालय में बैठकों के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण कामकाज प्रभावित होता था। छठी और सातवीं मंजिल पर कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और निजी सहायकों की भारी मौजूदगी से फाइलों की आवाजाही और अधिकारियों के काम में बाधा आती थी। इसी को देखते हुए मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी मंत्री के साथ केवल एक ही अधिकृत व्यक्ति को कैबिनेट हॉल तक जाने की अनुमति होगी, जबकि बाकी सभी को बाहर ही रुकना होगा।
लोकतांत्रिक संवाद सीमित
इन कड़े नियमों ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पैâसला लोकतांत्रिक संवाद को सीमित करता है। कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए मंत्रियों तक पहुंच पहले ही मुश्किल थी, अब यह और भी कठिन हो जाएगी। इससे सरकार और जनता के बीच की दूरी बढ़ने का खतरा जताया जा रहा है।
