सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति की सरकार सबके लिए मुसीबत बनी हुई है। बाहर से कितने ही ढोल पीट ले, भीतर हर मामले में खींचतान दिखती है। इसका ताजा शिकार मेडिकल स्टूडेंट्स को होना पड़ रहा है। हाल में राज्य के अस्पतालों में मेडिकल स्टूडेंट्स की लंबी अवैध ड्यूटी को लेकर गंभीर सवाल उठे। अनगिनत स्टूडेंट्स ने अपनी सीट छोड़ दी। कुछ सुसाइड के प्रयास भी सामने आए। इसके आलोक में राज्य सरकार ने मेडिकल स्टूडेंट्स की ड्यूटी के संबंध में भारत सरकार के नियमों का अनुपालन करने का निर्देश जारी किया।
लेकिन महायुति की आंतरिक खींचतान में यह मामला खटाई में पड़ता हुआ दिख रहा है। कैसा आदेश कब और किसने जारी किया और उस पर कोई अमल हुआ या नहीं, यह सब बातें अभी हवा में हैं। सचिवालय में या स्वास्थ्य निदेशालय में इसके बारे में पूछने पर कोई बताने को तैयार नहीं है, लेकिन कई मेडिकल कॉलेजों ने ऐसा आदेश मिलने की बात कही है।
भीतरखाने सबको मालूम है कि क्या चल रहा है।
दरअसल, पुणे के बीजे जीएमसी में हाल में एडमिशन लेने वाला एक स्टूडेंट किसी भाजपा नेता का बेहद करीबी है। उस स्टूडेंट को भी लगातार 36 घंटे की अवैध और अमानवीय ड्यूटी करनी पड़ रही है, तब उसके परिवार के लोगों ने राजनीतिक प्रभाव का लाभ उठाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय तक सच पहुंचा दिया। मामला भारत सरकार के कानून के अनुपालन का था। इसलिए आदेश निकालना कोई मुश्किल काम नहीं था। इसके बाद कई मेडिकल कॉलेज में इससे संबंधित आदेश भी निकल गए। यहां तक कि 2 अप्रैल तक सभी विभागाध्यक्षों से नए ड्यूटी रोस्टर मांगे गए। प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट को आरंभ के छह माह तक इमरजेंसी ड्यूटी में नहीं लगाने का निर्देश दिया गया। लेकिन मामला महायुति का फंस गया। बताया जाता है कि ऐसा निर्णय लेने से पहले महायुति में कोई बात नहीं हुई। राज्य में मेडिकल शिक्षा का मंत्रालय राकांपा मंत्री हसन मुशरिफ के हाथ है। राकांपा कोटे के मंत्री के विभाग का निर्णय भाजपा के इशारे पर होना तो प्रतिष्ठा की बात हो जाती है।
विवाद सामने आते ही अधिकारियों ने उक्त आदेश को छुपा लिया। कुछ मेडिकल कॉलेजों ने नए ड्यूटी रोस्टर बनाकर स्टूडेंट्स को राहत दी है। लेकिन अधिकारियों के भीतर संशय की स्थिति है। सबको इंतजार है कि महायुति में इस पर कोई चर्चा हो ताकि यह पता चले कि उक्त आदेश का पालन करना है, अथवा नहीं।
क्या है भारत सरकार का नियम?
मेडिकल कॉलेजों में पीजी स्टूडेंट्स के लिए भारत सरकार का 1992 का नियम लागू है। इसके अनुसार सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे और एक बार में अधिकतम 12 घंटे काम करना है। लेकिन बीजे जीएमसी पुणे सहित राज्य के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में अवैध रूप से अमानवीय 36 घंटे लगातार लंबी ड्यूटी लगती है। इससे मरीजों के इलाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लोगों को पता भी नहीं चल पाता कि उनका इलाज करने वाले डॉक्टर खुद दो दिन से सोए नहीं हैं। ऐसे में इलाज क्या करेंगे? मुंबई के कुछ कॉलेजों में भी चोरी छिपे फर्जी ड्यूटी रोस्टर बन रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार इसे केंद्र सरकार के नियम के अनुसार लागू करना चाहती है। लेकिन महायुति का पेंच फंसा है।
क्या है महाराष्ट्र सरकार का आदेश?
आईजीजीएमसी, नागपुर ने 30 मार्च 2026 को आदेश निकाला। इसके अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के सचिव ने रेजिडेंट डॉक्टरों की 48 घंटे वीकली ड्यूटी का सख्त निर्देश भेजा है। सभी विभागाध्यक्षों से 2 अप्रैल तक नया ड्यूटी रोस्टर मांगा गया, लेकिन अब इस आदेश को गोपनीय कर दिया गया है।
