मुख्यपृष्ठधर्म विशेषगणपति बनाएं धनपति

गणपति बनाएं धनपति

सांसारिक नजरिए से मानव का धनपति होना वरदान माना गया है। इसके विपरीत धन का अभाव अभिशाप। क्योंकि सुखी, शांति और पुरुषार्थ की प्राप्ति में धर्मशास्त्र भी धन की महिमा बताते हैं। दूसरी ओर धन की कमी या दरिद्रता से जीवन कई संताप व कलह से घिरकर नीरस व निरर्थक हो जाता है। यही वजह है कि हर इंसान द्वारा घर-परिवार के सुख के लिए किए जाने वाली कोशिशों में धन-संग्रह भी एक होता है। किंतु विपरीत हालात से धन का अभाव, बरकत न होना या कड़ी मेहनत से भी कम धन लाभ होना जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है। धार्मिक उपायों में धन से जुड़ी कामनाओं को पूरा करने और समस्याओं के अंत के लिए गणेशोत्सव के दौरान विघ्नहर्ता श्रीगणेश के साथ ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी का नीचे बताए मंत्र से ध्यान करना शुभ बताया गया है। जानिए यह मंत्र और आसान विधि- देवालय में भगवान गणेश व लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर पर पवित्र जल छिडक़ें या स्नान कराएं। हल्दी और कुंकुम मिलाकर भगवान गणेश व लक्ष्मी को लगाएं। अक्षत, पीले फूल, वस्त्र गणेश व लाल फूल, वस्त्र माता लक्ष्मी को अर्पित करें। इसके बाद फूल व अक्षत हाथ में लेकर नीचे लिखा लक्ष्मी विनायक मंत्र का ध्यान धन बाधाओं और दरिद्रता के अंत की कामना के साथ करें-
दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघ:ं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
अर्थ है- दाहिने हाथ में दंत-शंख, बांए हाथ में अभय मुद्रा व चक्र धारण करने वाले श्रीगणेश और अपने हाथों में कमल व सोने का घड़ा धारण करने वाली माता लक्ष्मी की मैं वंदना करता हूं। श्रीगणेश-लक्ष्मी की आरती कर घर के कोने-कोने में दीपज्योति फिराएं और ग्रहण करें।

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