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सरकारी लापरवाही से गड्ढों में फंसा पाइपलाइन प्रोजेक्ट … डेडलाइन पार ठेकेदार बेलगाम … मानसून से पहले हादसों का खतरा बढ़ा

सुरेश गोलानी / मुंबई
शहर में पाइपलाइन बिछाने के काम के नाम पर ठेकेदारों की मनमानी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जगह-जगह खोदे गए गड्ढे और अधूरे पड़े काम मीरा-भायंदर महानगरपालिका की लापरवाही को उजागर कर रहे हैं, जिससे नागरिकों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
राष्ट्रीय महामार्ग पर काशीमीरा पुलिस स्टेशन से उड़ानपुल तक पाइपलाइन बिछाने का काम मनपा द्वारा नियुक्त निजी ठेकेदार को दिया गया है। ठेकेदार ने सड़क पर बड़े पैमाने पर खुदाई तो कर दी, लेकिन काम की रफ्तार कछुए की चाल से भी धीमी बनी हुई है। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि यदि समय पर काम पूरा नहीं हुआ, तो मानसून के दौरान इन गड्ढों में पानी भर सकता है, जिससे बड़े हादसों की आशंका बढ़ जाएगी। मुंबई-अमदाबाद राष्ट्रीय महामार्ग जैसी व्यस्त सड़क पर ये गड्ढे जानलेवा साबित हो सकते हैं। एंबुलेंस और अग्निशमन जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, मनपा ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से इस १.५ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की अनुमति ली थी, जिसकी समय सीमा मार्च २०२६ में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है, जो नियमों और वर्क ऑर्डर की शर्तों का उल्लंघन माना जा रहा है।
गौरतलब है कि २१८ एमएलडी प्रतिदिन क्षमता वाली सूर्या क्षेत्रीय जल योजना के तहत इस परियोजना को तीन वर्ष पहले १६.७८ करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया। मनपा का दावा था कि यह योजना भविष्य की ४५० एमएलडी जल आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और २०२५ तक पूरी हो जाएगी। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। मनपा की आर्थिक तंगी और सरकारी उदासीनता के चलते काम की गति बेहद धीमी है। मानसून में अब केवल डेढ़ महीना बाकी है, लेकिन अब तक सिर्फ करीब ७० प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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