रामदिनेश यादव / मुंबई
दिल्ली के विवेक विहार इलाके में एसी ब्लास्ट से इमारत के ९ लोगों की मौत की घटना ने दिल्ली को दहका दिया है। एसी ब्लास्ट की इस घटना से मुंबईकरों में भय का माहौल बन गया है। चूंकि इस भीषण गर्मी में मुंबई में भी बड़े पैमाने पर सेफ्टी नियमों की अनदेखी कर एसी का उपयोग हो रहा है। ऐसे में मुंबई को भी `एसी’ बमों का खतरा बना हुआ है। इस घटना के बाद मुंबई मनपा प्रशासन को सचेत होने की सख्त जरूरत है और जनता को भी फायर सेफ्टी नॉर्म्स के साथ एसी उपयोग के सेफ्टी नियमों का पालन करने की जरूरत है। ऐसे में गर्मी के इस मौसम में मुंबईकरों को एसी के खतरे से सावधान रहना होगा। ताकि मुंबई में दिल्ली जैसा हादसा न हो।
जानकारों की मानें तो मुंबई और दिल्ली में कोई खास अंतर नहीं है। गर्मी और घनी आबादी के बीच एसी का बड़े पैमाने पर हो रहे इस्तेमाल से दिल्ली घटना की पुनरावृत्ति यहां भी हो सकती है। उसके कई कारण हैं। पुराने एसी की सर्विसिंग समय से नहीं होने और लगातार भारी दबाव में भी इस्तेमाल करने पर ब्लास्ट की संभावना बढ़ जाती है। यह जानकारी एसी सप्लायर अनिल विश्वकर्मा ने दी।
बम की तरह ब्लास्ट हो सकता है एसी
एसी मैकेनिक गुड्डू यादव ने बताया कि एसी गर्मी में राहत तो दे सकती है, लेकिन यदि वह पुरानी है, सर्विस नहीं की गई है और इलेक्ट्रिक लोड के लिए सेफ्टी किट नहीं है तो वह बम की तरह ब्लास्ट हो सकती है। दिल्ली में हुई घटना इसी का जीता जागता सबूत है।
पिछले १ साल में मुंबई में हुए
५ एसी ब्लास्ट,२ की गई थी जान
मुंबई में पिछले वर्ष एयर कंडीशनर (एसी) से जुड़ी आग, ब्लास्ट और शॉर्ट-सर्किट की ५ घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कुछ मामलों में २ मौतें हुर्इं, दर्जन भर लोग घायल हुए और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ। जून २०२५ में माहिम में एक क्लाउड किचन के बाहर लगे एसी आउटडोर यूनिट में जोरदार विस्फोट हुआ था।
कटे पेड़, तपा शहर!
एसी पर निर्भरता खतरनाक
मुंबई में पिछले १० वर्षों में गर्मी का टेंपरेचर भी ५ से ७ डिग्री बढ़ा है। पर्यावरण जानकार सुरेश काले ने बताया कि मुंबई में लगातार वृक्षों की संख्या कम हुई है। गर्मी का टेंपरेचर भी यहां लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में एसी ज्यादातर घरों में लगे हैं। इमारतों में तो लगभग हर घर और हर दुकान में एसी है, पर उसकी जांच के लिए सरकार के पास कोई यंत्रणा नहीं हैं। मनपा के फायर सेफ्टी नॉर्म्स भी पर्याप्त नहीं है। मनपा प्रशासन की घोर लापरवाही से मुंबई में एसी ब्लास्ट होना और बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
सरकार के विकास की आड़ में पर्यावरण के पतन से ग्लोबल वार्मिंग के खतरे ने लोगों को एसी के इस्तेमाल के लिए मजबूर कर दिया है। मौजूदा समय में मुंबई की डेढ़ करोड़ से अधिक आबादी के बीच लगभग ८० लाख से अधिक एसी यूनिट्स लगे हैं। जिनमें ३० लाख से अधिक एसी १० साल से अधिक पुराने हैं, जबकि २० लाख एसी १५ से २० साल पुराने हैं। इनके मेंटनेंस और सर्विस को लेकर मनपा के पास कोई ठोस रणनीति और योजना नहीं है। हालात ये हैं कि पिछले १७ साल से मनपा में एसी यूनिट को लेकर कोई ऑडिट तक नहीं किया गया है।
