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संपादकीय : उन बालिकाओं से माफी मांगिए!

देशभर के करोड़ों मोबाइलों पर शनिवार को दो बार सायरन बजा। जनता को आपातकालीन संदेश देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से यह परीक्षण किया गया था। संकट काल में लोग सावधान रहें, इसके लिए केंद्र सरकार ने यह सायरन बजाया, लेकिन जब प्रतिदिन महिलाओं और छोटी बच्चियों पर बलात्कार एवं अत्याचार हो रहे हैं, तब सरकार की कानून-व्यवस्था का ‘सायरन’ क्यों नहीं बजता? भोर तहसील के नसरापुर गांव में एक चार वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएं बार-बार घट रही हैं। मुख्यमंत्री के नागपुर में भी अत्याचार पीड़ित महिलाओं की करुण पुकारें सुनाई दे रही हैं। सांगली में भी ऐसे उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। सरकार महिला अत्याचार के विषय में निष्क्रिय है और अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं और गृह विभाग भी उन्हीं के पास है। इसका अर्थ है कि कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा का उत्तरदायित्व उन्हीं पर है। पिछले एक महीने से महाराष्ट्र को उसके हाल पर छोड़कर मुख्यमंत्री फडणवीस पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। अन्य राज्यों में जाकर वे इस बात का दावा कर रहे थे कि महाराष्ट्र में सब कुछ कितना उत्तम चल रहा है, जबकि वास्तव में महाराष्ट्र में स्थिति इसके विपरीत है। राज्य में भ्रष्टाचार और
महिलाओं पर होने वाले अत्याचार
चरम पर हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस कहते हैं, ‘इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।’ मुख्यमंत्री को ऐसे प्रकरणों में राजनीति पसंद नहीं है, यह ठीक है, परंतु क्या इसका अर्थ यह है कि विपक्षी दल ऐसे अत्याचारों पर अपना मुंह सिलकर चुप बैठे रहें? जहां भाजपा विरोधी दलों की सरकारें हैं, वहां ऐसी दुर्घटनाएं होने पर भाजपा किस निचले स्तर की राजनीति करती है, इसे मुख्यमंत्री फडणवीस को समझना चाहिए। कोलकाता के आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज में हुई बलात्कार और हत्या की घटना को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक उत्पात मचाया था। वहां प्रदर्शन करके राज्य बंद करने का प्रयास किया गया, परंतु जब भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं होती हैं, तब उन्हें राजनीति नहीं चाहिए होती। यह मुख्यमंत्री की संवेदनाएं समाप्त होने का लक्षण है। भोर और चाकण में एक ही समय पर अल्पायु बच्चियों पर अत्याचार हुए और उन पर जनता अपना आक्रोश व्यक्त न करे, सत्ताधारियों की यह मानसिकता क्रूर है। जनता आक्रोशित है। नसरापुर में रास्ता रोको आंदोलन हुआ। मुख्यमंत्री कड़ी कार्रवाई और आरोपी को फांसी की सजा देने की घोषणा करते हैं और पुन: नई राजनीतिक चालों में व्यस्त हो जाते हैं। क्या इससे बच्चियों के प्राण बचेंगे? ऐसे मामलों में अब तक कितने अपराधियों को मृत्युदंड दिया गया है? संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद दुबे
निर्लज्जतापूर्वक
बलात्कार के आरोपी कुलदीप सेंगर का समर्थन कर रहे थे। ​यदि भाजपा का यही चरित्र है तो उनके राज्य में महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित रहेंगी ही नहीं। चाकण, नसरापुर, नागपुर की जिन लड़कियों पर अत्याचार हुए, उनकी ‘माताएं’ शायद सरकार के १,५०० रुपए मानदेय वाली लाडली बहनें होंगी। १,५०० रुपए प्रतिमाह दिए इसलिए लाडली बहनों की बेटियों पर बलात्कार, अत्याचार करने का लाइसेंस सरकार ने दिया है क्या? नसरापुर अत्याचार-हत्या मामले में ‘आरोपी’ को हमारे हवाले करो, यह भीड़ की मांग थी। मासूम का शव सड़क पर रखकर जब लोगों ने न्याय के लिए चीख-पुकार की, तब पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज किया। सच तो यह है कि इस पूरे मामले में अगर कोई असली आरोपी है, तो वह फडणवीस की सरकार है। मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के गृह मंत्री के रूप में असफल रहे हैं। उनके द्वारा खड़ी की गई व्यवस्था ढह गई है। इसीलिए राज्य में हर जगह मासूमों पर बलात्कार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ सड़क के उद्घाटन के समय ट्रैफिक जाम होने के कारण लोगों से माफी मांगी थी। नसरापुर, चाकण, नागपुर में मासूम बच्चियों पर जो अमानवीय यौनाचार, अत्याचार हुए, वह गृह विभाग की विफलता है इसलिए मुख्यमंत्री को राज्य की सभी बालिकाओं और उनकी माताओं से माफी मांगनी चाहिए। यह विषय राजनीति से परे है। यह मानवता और महिलाओं के सम्मान का है!

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