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बारगी डैम हादसा … पानी में डूबी जिम्मेदारी!

– अनिल तिवारी
जबलपुर के बारगी डैम में क्रूज पलटने की घटना ने फिर साबित कर दिया कि जल-पर्यटन के नाम पर आम लोगों की जिंदगी को जोखिम में छोड़ा जा रहा है। पहले मृतकों की संख्या ११ बताई गई थी, जबकि ताजा रिपोर्टों में यह आंकड़ा १३ तक पहुंचने की बात सामने आई है। हादसे के समय तेज हवा और खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद क्रूज संचालन पर सवाल उठ रहे हैं।
कुछ ही सप्ताह पहले मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में यमुना नदी में नाव पलटने से कई श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। बारगी और यमुना, दोनों घटनाएं अलग-अलग जगहों की जरूर हैं, लेकिन दर्द और लापरवाही का स्वरूप एक जैसा है, अपर्याप्त सुरक्षा, कमजोर निगरानी और हादसे के बाद जांच की औपचारिक घोषणा। सवाल यह है कि जब सड़क, रेल और हवाई यात्रा के लिए नियम हैं, तो जल-पर्यटन में सुरक्षा इतनी ढीली क्यों है? लाइफ जैकेट, मौसम चेतावनी, यात्रियों की संख्या और प्रशिक्षित स्टाफ जैसी बुनियादी बातें भी यदि अनिवार्य नहीं होंगी, तो ऐसे हादसे रुकेंगे वैâसे?
मुआवजा नहीं, जवाबदेही चाहिए
सरकारें मुआवजा देकर जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकतीं। जरूरत है कठोर राष्ट्रीय जल-यात्रा सुरक्षा नियमावली, नियमित निरीक्षण और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की। आम आदमी की जान मनोरंजन उद्योग की कीमत नहीं बन सकती।

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