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खतरे में ‘बेस्ट’ कर्मचारी …विक्रोली डिपो का हाल जर्जर …टूटी छतें, बदहाल सुविधाएं, फिर भी प्रशासन खामोश

कर्मचारियों की जान पर संकट
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई की लाइफ लाइन मानी जाने वाली बेस्ट सेवा के कर्मचारियों की सुरक्षा खुद खतरे में है। विक्रोली बेस्ट बस डिपो की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां काम करना किसी जोखिम से कम नहीं। टूटी छतों, दरारों से भरी दीवारों के बीच कर्मचारी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। बेस्ट के २७ डिपो के निरीक्षण के दौरान समिति सदस्य नितिन नाडगांवकर ने विक्रोली डिपो की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। निरीक्षण में सामने आया कि डिपो की दीवारों में बड़ी दरारें हैं, छत कमजोर हो चुकी है और परिसर में झाड़ियां उग आई हैं। इतना ही नहीं, आसपास सांपों की मौजूदगी की खबरें भी सामने आई हैं।
हालांकि सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह खतरनाक स्थिति अब सामान्य बन चुकी है। कर्मचारियों के अनुसार, वे रोजाना इसी असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं। बेस्ट प्रशासन की लापरवाही के चलते उन्हें बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक कंडक्टर ने बताया, ‘हम हर दिन इस डर के साथ काम पर आते हैं कि इमारत कभी भी गिर सकती है। छत की हालत बेहद खराब है। यात्रियों की जिम्मेदारी हमारी है, लेकिन हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?’ एक अन्य ५० वर्षीय ड्राइवर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय तक ड्यूटी करने के बाद कर्मचारियों के लिए यही डिपो आराम की जगह होता है, लेकिन यहां की हालत देखकर ऐसा लगता है जैसे उनकी सुरक्षा का कोई महत्व ही नहीं है। कर्मचारियों ने बताया कि मानसून के दौरान हालात और भी खराब हो जाते हैं। छत से पानी टपकने लगता है और इलेक्ट्रिक शॉक का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि फंड आवंटन और पुनर्विकास की योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक बेस्ट कर्मचारी इस खतरनाक माहौल में काम करने को मजबूर रहेंगे।

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