हिंदुस्थानियों के लिए राहत का कदम
एजेंसी / वॉशिंगटन
अमेरिका की फेडरल ट्रेड कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की १० प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ नीति को गैरकानूनी करार देते हुए बड़ा झटका दिया है। अदालत ने साफ कहा कि व्यापार घाटे के नाम पर राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती। इस पैâसले को भारत समेत कई देशों के लिए राहत माना जा रहा है, क्योंकि ट्रंप की टैरिफ नीति का असर वैश्विक व्यापार और निर्यात बाजार पर पड़ रहा था। कोर्ट के इस पैâसले के बाद ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों और राष्ट्रपति की शक्तियों पर नई बहस छिड़ गई है। इस पैâसले के बाद कहा जा रहा है कि जो काम हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं कर पाए उसे अमेरिका की कोर्ट ने कर दिखाया। बता दें कि पीएम मोदी भारत पर लगे टैरिफ पर मौन रहे थे और उसका कोई हल निकाल पाने में असमर्थ साबित हुए थे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जो काम पीएम मोदी नहीं करवा पाए थे उसे अमेरिकी कोर्ट ने कर दिया। अपने पैâसले में कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने १९७४ के एक व्यापार कानून के तहत अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया है। २-१ के बहुमत वाले पैंâस में, अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन १९७४ के ‘व्यापार अधिनियम’ की धारा १२२ का इस्तेमाल व्यापक व्यापार और चालू खाते के घाटे को आधार बनाकर टैरिफ लगाने के लिए नहीं कर सकता।
मामला फिर पहुंच
सकता है सुप्रीम कोर्ट!
जज टिमोथी स्टैंसियू ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के समर्थन में खड़े थे। उन्होंने तर्क दिया कि कोर्ट को राष्ट्रपति के आर्थिक निर्णयों पर सवाल नहीं उठाना चाहिए और न ही यह संकीर्ण रूप से परिभाषित करना चाहिए कि भुगतान-संतुलन घाटे को वैâसे मापा जाता है। फिलहाल, कोर्ट के इस पैâसले के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका की फेडरल सर्किट अपीलीय कोर्ट में अपील की जा सकती है और मामला आखिरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है।
कोर्ट ने जताई चिंता, राष्ट्रपति को नहीं मिल सकती खुली छूट!
अदालत ने कहा कि प्रशासन ने ‘भुगतान-संतुलन घाटे’ की बजाय चालू खाते के घाटे और व्यापार घाटे का हवाला दिया, जबकि १९७४ में कांग्रेस का उद्देश्य सीमित परिस्थितियों में ही इस प्रावधान का उपयोग करना था। जजों ने चेतावनी दी कि इस तरह की व्यापक व्याख्या को स्वीकार करने से राष्ट्रपति को प्रभावी रूप से असीमित टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
