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तहकीकात : भरोसे का कत्ल

फिरोज खान

११०० किलोमीटर दूर फेंके महिला के लाश के टुकड़े
कहीं पर हाथ पैर, तो कहीं पर मिला धड़
८ जून को इंदौर में एक ट्रेन में एक महिला का बिना हाथ-पैर वाला शव मिला। इस शव की पहचान को लेकर तमाम भाग-दौड़ की जा रही थी, तभी अगले दिन करीब १,१५० किलोमीटर दूर उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक ट्रेन में एक महिला के कटे हुए दोनों हाथ और दोनों पैर मिले। जीआरपी ने जब इन टुकड़ों का मिलान किया तो ये टुकड़े एक ही महिला के पाए गए।
रेलवे पुलिस लगभग १,२०० किलोमीटर में पैâले इन टुकड़ों को तो मिलाने में कामयाब हो गई, लेकिन अब समस्या थी शव की पहचान करने की और कातिल को खोजने की। इलाकों में मामले की खोजबीन शुरू की। शव की शिनाख्त तो हो गई थी, लेकिन हत्यारे को खोजना बड़ी चुनौती थी। पुलिस ने आसपास के इलाकों में अपने गुप्तचर पैâलाए। तमाम जानकारियों के बाद शक की सुई ललितपुर जिले के ६० साल के एक शख्स पर जाकर टिकी। आरोपी ने पुलिस को जो कहानी बताई वह वाकई हैरान करने वाली थी। ६ जून की शाम को उज्जैन रेलवे स्टेशन पर आरोपी को एक महिला अकेले गुमसुम बैठी मिली। उसने अपनापन दिखाते हुए महिला से उसकी कहानी पूछी तो पता चला कि वह अपने पति से किसी बात पर गुस्सा होकर आई है और वह मथुरा जा रही है। आरोपी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसे भरोसा दिलाया और कहा कि अभी मथुरा की कोई ट्रेन नहीं है। उसने महिला से कहा उसका घर करीब है। खाना खाकर आते हैं फिर वह उसे मथुरा की ट्रेन में बैठा देगा। महिला आरोपी की बातों में आ गई और उसके घर चली गई। वहां दोनों ने खाना खाया। इस बीच आरोपी ने महिला के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं। थकी-हारी महिला को नींद आ गई। महिला को नींद में आते देख आरोपी की आंखों में वासना जाग उठी। अब वह बेहोश महिला के साथ संबंध बनाने लगा तभी, महिला को होश आ गया और उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। आरोपी ने पास में ही पड़े लोहे के बड़े से नट से महिला के मुंह पर हमला किया। इस हमले से महिला बेहोश हो गई। बाद में उसने रस्सी से महिला का गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी। महिला की लाश को ठिकाने लगाने के लिए वह बाजार गया और वहां से छुरा खरीदकर लाया। छुरे से महिला के शरीर के टुकड़े करके बैग और प्लास्टिक की बोरियों में भर दिया। शरीर के टुकडों की तीन अलग-अलग पैकिंग की गईं। इनमें से दो पैकिंग को उसने उज्जैन आउटर पर रुकी इंदौर नागदा पैसेंजर ट्रेन की एक सीट के नीचे रख दिया। अब वह फिर घर आया और शाम को घर में रखी एक और पैकिंग को लेकर फिर स्टेशन पहुंचा और इंदौर देहरादून ट्रेन के कोच की कपलिंग में रख दिया।

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