मुख्यपृष्ठस्तंभपश्चिम बंगाल में बुलडोजर ... जमीन पर भी, राजनीतिक जमीर पर भी

पश्चिम बंगाल में बुलडोजर … जमीन पर भी, राजनीतिक जमीर पर भी

 

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही भाजपा ने अपनी नई शासन-शैली के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। एक तरफ मंत्री दिलीप घोष कह रहे हैं कि ‘बुलडोजर पूरे देश में चलेगा’ और जहां भी अवैध निर्माण होगा, वहां कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ भाजपा विधायक सजल घोष ने संकेत दिया है कि स्कूल पाठ्यक्रम से सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े अध्याय हटाए जा सकते हैं। इसी बीच टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी भाषणों को लेकर प्राथमिकी दर्ज हो गई है।
इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने या पाठ्यक्रम सुधारने का मामला नहीं है। यह सत्ता में आते ही राज्य की स्मृति, राजनीति और विपक्ष, तीनों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश जैसा दिखता है। बुलडोजर अगर अवैध निर्माण पर चले तो कानून का हिस्सा है, लेकिन जब वही बुलडोजर सत्ता का प्रतीक बन जाए तो वह भय का औजार बन जाता है। सिंगूर और नंदीग्राम केवल पाठ्यपुस्तक के अध्याय नहीं हैं। वे बंगाल की राजनीतिक चेतना, किसान आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के इतिहास का हिस्सा हैं। उन्हें हटाने का संकेत इतिहास को सुधारने से अधिक इतिहास को सुविधानुसार संपादित करने की कोशिश माना जाएगा। हर नई सरकार को पाठ्यक्रम की समीक्षा का अधिकार है, लेकिन इतिहास का हिसाब राजनीतिक बदले की भाषा में नहीं लिखा जाना चाहिए। अभिषेक बनर्जी पर प्राथमिकी भी कानून की कसौटी पर जांची जानी चाहिए, राजनीतिक बदले की भावना से नहीं।

अन्य समाचार