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सीमा पार से तकनीकी आतंक का नया खतरा …सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती

जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि धमाके में स्थानीय मददगारों के साथ पाकिस्तान-स्थित हैंडलरों की भूमिका संदिग्ध है। पंजाब पुलिस ने इस मामले में उमर दीन और अनिल को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि विस्फोटक उपकरण लगाने, रेकी करने और वारदात को अंजाम देने में उनकी भूमिका रही।
चिंता की बात यह है कि आतंकी नेटवर्क अब केवल हथियार या विस्फोटक भेजने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मोबाइल सिम, छोटी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, ४जी वैâमरे और सोलर निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है। कुछ दिन पहले ही पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने आईएसआई समर्थित जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इसमें सैन्य ठिकानों की निगरानी के लिए सोलर पैनल और सिम-युक्त वैâमरों का उपयोग किए जाने की बात सामने आई।
यह घटनाक्रम बताता है कि सीमा पार आतंकवाद अब ‘लो-कॉस्ट, हाई-टेक’ मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। यानी छोटे उपकरण, स्थानीय संपर्क और इंटरनेट/सिम आधारित नियंत्रण के जरिए बड़े सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश हो रही है। नेपाल, पंजाब, दिल्ली और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े अलग-अलग मामलों में भी जांच एजेंसियां जासूसी, कट्टरपंथी नेटवर्क और विदेशी हैंडलरों के संबंधों की कड़ियां जोड़ रही हैं। इसी बीच सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर भारत की चिंता भी बढ़ी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान ने किसी तरह का दुस्साहस किया तो भारत निर्णायक जवाब देगा।
बदल रहा है आतंकवाद का चेहरा
इन घटनाओं का संकेत स्पष्ट है, भारत के सामने अब पारंपरिक घुसपैठ से ज्यादा खतरनाक चुनौती तकनीकी जासूसी और रिमोट-संचालित आतंक की है। इसके लिए सीमा सुरक्षा, साइबर निगरानी, सिम सत्यापन, ड्रोन-रोधी व्यवस्था और संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध वैâमरों / डिवाइस की नियमित जांच को और मजबूत करना होगा। आतंकवाद का चेहरा बदल रहा है; जवाबी सुरक्षा ढांचा भी उसी गति से बदलना जरूरी है।

जालंधर में विस्फोट में एक नई बात सामने आई है कि आतंकी उमरदीन ने अपने ही सिम का इस्तेमाल विस्फोट के लिए किया था। उसने विस्फोटक सामग्री के बीच अपना सिम फिट किया था। उस सिम पर कॉल की तो धमाका हो गया।

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