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विश्व मानव कल्याण ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का द्वितीय दिवस

सामना संवाददाता / मुंबई

श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में कथावाचक डॉ. आचार्य अशोक मिश्रा के सान्निध्य में भगवान श्रीहरि के चौबीस दिव्य अवतारों का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा और धर्म की हानि हुई, तब भगवान ने विभिन्न अवतार धारण कर भक्तों की रक्षा तथा दुष्टों का विनाश किया।
कथा के दौरान भगवान के प्रमुख अवतारों सनकादिक, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नृसिंह, वामन, परशुराम, वेदव्यास, श्रीराम, बलराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध एवं कल्कि आदि अवतारों की महिमा का गुणगान किया गया।
इस अवसर पर विशाल श्रोता समुदाय ने कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया। मुख्य रूप से नरेंद्र भाई शाह, कैप्टन वरुण कुमार दुबे, एडवोकेट अरुण कुमार दुबे, जिला भाजपा नेता पाल (यूबीटी), मधुका भांडारकर सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और भावविभोर होकर कथा का रसपान किया। कथा में बताया गया कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य भगवान की भक्ति एवं सत्संग के माध्यम से आत्मकल्याण करना है। द्वितीय दिवस की कथा में महर्षि वेदव्यास जी के आगमन का प्रसंग भी सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि वेदव्यास जी ने समस्त वेदों एवं पुराणों की रचना करने के बाद भी आत्मशांति का अनुभव नहीं किया। तब देवर्षि नारद के निर्देश पर उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया।
इसके पश्चात् श्री शुकदेव जी के जन्म की कथा का वर्णन हुआ। बताया गया कि शुकदेव जी जन्म से ही परम ज्ञानी एवं वैराग्यवान थे। जन्म लेते ही वे वन की ओर तपस्या के लिए प्रस्थान कर गए। कथा के अंत में भजन-कीर्तन एवं आरती के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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