मुख्यपृष्ठस्तंभविक्रम-बेताल :  कंगाल देश का रक्षा बजट

विक्रम-बेताल :  कंगाल देश का रक्षा बजट

एम एम एस

एक बार फिर घने और डरावने जंगल के सन्नाटे को चीरती हुई राजा विक्रम की तलवार चमकी। उन्होंने पेड़ पर लटके शव को उतारा, अपने मजबूत कंधे पर लादा और मौन धारण कर श्मशान की ओर बढ़ने लगे। तभी शव के भीतर से बेताल की डरावनी अट्टहास गूंजी, ‘राजन’ तुम्हारी इस अटूट निष्ठा और धैर्य का मैं कायल हूं। रास्ता लंबा है, चलो तुम्हारी थकान कम करने के लिए तुम्हें आधुनिक युग के एक ऐसे भूभाग की गाथा सुनाता हूं, जो जम्मूद्वीप के उत्तर-पश्चिम छोर पर स्थित है। वह अपनी जनता की भूख को भुलाकर बारूद के ढेर पर बैठकर खुश हो रहा है। ‘
बेताल की कहानी: कंगाली और बारूद
‘हे राजन! यह कहानी है जम्मूद्वीप के उत्तर-पश्चिम में बसे पाकिस्तान नाम के उस क्षेत्र की, जो वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और नीतिगत दलदल में फंसा हुआ है। वहां की आम जनता रोटी, दाल, बिजली और र्इंधन जैसी बुनियादी चीजों के लिए तरस रही है। महंगाई सातवें आसमान पर है और विदेशी मुद्रा भंडार इस कदर सूख चुका है कि महज कुछ हफ्तों के आयात के लिए भी उसे तरसना पड़ रहा है। देश पर घरेलू और विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को चालू रखने के लिए वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और चीनी व सऊदी जैसे मित्र देशों से मिलने वाले बेलआउट पैकेज और कर्ज पर पूरी तरह निर्भर हो चुका है।’
‘लेकिन राजन, आश्चर्य की बात देखो! इस चरमराती अर्थव्यवस्था और कंगाली के बीच भी वहां की सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए अपने रक्षा बजट में करीब १०० अरब रुपए का इजाफा करने जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक ताजा रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इस क्षेत्र का रक्षा खर्च चालू वित्त वर्ष के २.५६ लाख करोड़ से बढ़कर २.६६ लाख करोड़ वहां की मुद्रा होने का अनुमान है। यह आंकड़ा मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में करीब १३.५ प्रतिशत (दो लाख करोड़ रुपये से अधिक) ज्यादा है।’
‘पहले बजट से गायब बड़े हिस्से की बात बड़े ध्यान से सुन। आधिकारिक बजट में सेना की भारी-भरकम पेंशन को ‘नागरिक प्रशासन’ के खर्च में छिपा दिया जाता है। उनके परमाणु कार्यक्रम का गुप्त खर्च और विदेशों से खरीदे जाने वाले आधुनिक हथियार (जैसे जे-१०सी विमान और पनडुब्बियां) सीधे रक्षा बजट में न दिखाकर ‘विदेशी कर्ज’ या अन्य खातों में डाल दिए जाते हैं।’
बेताल आगे बोला, ‘राजन, इस क्षेत्र की बदहाली का दूसरा और सबसे कड़वा पहलू है उसका ‘आतंकवाद का उद्योग’। वहां की गुप्तचर संस्था (आईएसआई) और सेना का जम्मूद्वीप के मुख्य भूभाग (भारत) के खिलाफ सक्रिय आतंकी संगठनों (जैसे लश्कर और जैश) के साथ एक अटूट गठजोड़ है।’
‘आईएसआई के ‘सीक्रेट सर्विस फंड’ का एक बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार चलाने में खर्च होता है। आतंकियों के ट्रेनिंग वैंâप अक्सर पाक अधिकृत कश्मीर में सेना की चौकियों की सुरक्षा में चलते हैं।’ ‘इसी ‘आतंकवाद के उद्योग’ के कारण यह क्षेत्र लंबे समय तक एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहा।’
राजा विक्रम का न्यायपूर्ण उत्तर
राजा विक्रम बोले,‘सुन बेताल! इस आत्मघाती नीति के पीछे वहां का ‘सत्ता का ढांचा’ है। ‘सेना के अस्तित्व और उसकी इस असीमित शक्ति का एकमात्र औचित्य जम्मूद्वीप के मुख्य भूभाग (भारत) का डर’ दिखाना और ‘कश्मीर का राग’ अलापना है। यदि वह मुख्य भूभाग से शांति कर ले या रक्षा बजट कम कर दे, तो वहां की जनता के बीच सेना की यह सर्वोच्चता और उनका अरबों का व्यावसायिक साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। इसलिए, वहां की सेना जानबूझकर भारत विरोधी नैरेटिव और आतंकवाद को जीवित रखती है, ताकि नागरिक सरकार हमेशा उनके नीचे दबी रहे। वे आईएमएफ से कर्ज अपनी जनता को बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सैन्य स्वायत्तता और सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए लेते हैं। यह कंगाली में रक्षा बजट बढ़ाना उस क्षेत्र की जरूरत नहीं, बल्कि वहां के सैन्य जनरलों की मजबूरी और लालच है।’
विक्रम का यह सटीक और तार्किक उत्तर सुनते ही बेताल खिलखिलाकर हंसा और बोला, ‘शाबाश राजन, तुमने बिल्कुल सही न्याय किया, लेकिन तुमने अपनी चुप्पी तोड़ दी, इसलिए मैं चला!’ इतना कहते ही बेताल कंधे से उड़ा और वापस पेड़ की डाल पर जा लटका। विक्रम ने एक बार फिर अपनी तलवार संभाली और बेताल को लाने के लिए वापस मुड़ गए।
बेताल का प्रश्न
कहानी समाप्त कर बेताल श्मशान के सन्नाटे में जोर से हंसा और बोला,‘तो सुन विक्रम! मेरा प्रश्न यह है कि जो क्षेत्र कर्ज के जाल में पूरी तरह डूबा हो, जिसकी रीढ़ की हड्डी खुद भ्रष्टाचार और कर चोरी से टूट चुकी हो, और जो आईएमएफ के सामने एक-एक पाई के लिए गिड़गिड़ा रहा हो… वह अपनी भूखी जनता को भोजन देने के बजाय अपने रक्षा बजट को बढ़ाने और आतंकवाद को पालने की आत्मघाती नीति पर क्यों अड़ा हुआ है? इसका असली रणनीतिक कारण क्या है? याद रहे राजन, अगर तुमने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी, तो मैं तुम्हारे सिर के टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा!’

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