लखनऊ में डीजीपी कार्यालय ने पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया अनुशासन पर सख्त आदेश जारी किया है। साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी और हर महीने रिपोर्ट देनी होगी। यह कदम बताता है कि सोशल मीडिया अब सिर्फ समय काटने का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन, रिश्तों और मानसिक संतुलन के लिए चुनौती बन चुका है।
आज घरों में बातचीत घट रही है और स्क्रीन का दखल बढ़ रहा है। बच्चे, युवा और कर्मचारी, सभी इसके असर में हैं। इसी चिंता के कारण कई देश कड़े कदम उठा रहे हैं। स्पेन ने १६ साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना घोषित की है। ऑस्ट्रेलिया ने १० दिसंबर २०२५ से १६ वर्ष से कम बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खाते बनाने या रखने पर रोक लागू कर दी है। फ्रांस में १५ वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकीय सहमति की व्यवस्था पर जोर है। ब्रिटेन में ऑनलाइन सेफ्टी कानून के तहत बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए उम्र सत्यापन और प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। भारत में भी समय आ गया है कि सोशल मीडिया को अधिकार नहीं, जिम्मेदारी के साथ देखा जाए।
