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एफबीआई बॉस काश पटेल की ‘लग्जरी डेट’ और सरकारी जेट का उड़ता तीर!

मनमोहन सिंह

कहते हैं, ‘हाथी चले बाजार, तो कुत्ते भौंके हजार’ इस मुहावरे में कुत्ते शब्द का शाब्दिक अर्थ यानी लिटरेरी अर्थ ‘कुत्ता’ मत रखिए आपसे गुजारिश है। अमेरिकी राजनीति में जब बात डोनाल्ड ट्रंप के चहेते और एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल की हो, तो विरोधी हमेशा उनके पीछे हाथ धोकर पड़े रहते हैं। इस बार तो मामला ऐसा उछला है कि मानो विरोधियों को ‘बैठे-बिठाए गंगा नहाने’ का मौका मिल गया हो!
खबर गर्म है कि भाई साहब अपनी २७ साल की सिंगर गर्लप्रâेंड एलेक्सिस विल्किंस के साथ एफबीआई के आलीशान गल्फस्ट्रीम-न्न् जेट पर सवार हुए और सीधे फिलाडेल्फिया पहुंच गए कंट्री म्यूजिक का लुत्फ उठाने।
इतना ही नहीं, मिर्च-मसाला यह भी है कि वहां उन्होंने ३५ से ५० हजार डॉलर (करीब २९ से ४१ लाख रुपए) के वीआईपी प्राइवेट सूट में बैठकर कॉन्सर्ट देखा। अब इस चक्कर में बेचारे सुरक्षाकर्मियों और फ्लाइट क्रू की रातों की नींद उड़ गई और देर रात तक ड्यूटी करने की वजह से टैक्सपेयर्स के पैसों पर ‘ओवरटाइम’ का तगड़ा बिल फट गया।
लेकिन हकीकत क्या है? जरा पैâक्ट्स का चश्मा पहनिए तो। अब जब मीडिया ने ‘राई का पहाड़’ बना ही दिया था, तो एफबीआई को सामने आकर डैमेज कंट्रोल करना पड़ा।
सरकारी जेट का प्रोटोकॉल: नियम कहते हैं कि सुरक्षा कारणों से एफबीआई डायरेक्टर को अपनी हर यात्रा (चाहे वो ऑफिशियल हो या पर्सनल) सरकारी विमान से ही करनी होती है। तो जेट का इस्तेमाल कोई चोरी नहीं, नियम था। यानी मामला प्रोटोकॉल का है।
एफबीआई ने साफ किया कि इस महंगे सूट का बिल सरकारी खजाने से नहीं गया। दरअसल, गर्लप्रâेंड साहिबा खुद एक कंट्री सिंगर हैं और वे उस शो में बतौर ‘इन्वाइटेड गेस्ट’ गई थीं। यानी यह आलीशान खातिरदारी आयोजकों की तरफ से थी। यानी ५० हजार डॉलर का सूट का खर्च टैक्स पेयर के जेब से नहीं है।
अब सवाल यह है कि क्या कोई काश पटेल के पीछे ही पड़ गया है? तो जवाब है राजनीति में ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता।’ काश पटेल ट्रंप के बेहद करीबी हैं, इसलिए वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों और विरोधी मीडिया की नजरें हमेशा उन पर ‘चील की तरह’ टिकी रहती हैं। इससे पहले भी वे हवाई में स्नॉर्कलिंग और मिलान में बीयर पीने को लेकर घिर चुके हैं।
लब्बो-ओ-लुआब ये कि काश पटेल किसी अंतर्राष्ट्रीय साजिश का शिकार भले न हों, लेकिन विरोधियों के लिए वो एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ जरूर हैं। खैर, जेट का इस्तेमाल नियमों के दायरे में था, लेकिन जनता के पैसों पर सुरक्षाकर्मियों का ओवरटाइम देख विरोधी तंज कस रहे हैं कि साहब तो ‘दूसरों के फटे में पैर अड़ाने’ का मौका ढूंढने वालों के हाथ खुद ही अपना शिकार थमा बैठे!

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