मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाअंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर रचना... बस एक चाय मिल जाए।

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर रचना… बस एक चाय मिल जाए।

हर कोई इसका है दीवाना,
मेल-मिलाप का ‘सीधा-सरल’ खजाना।
इसके लिए कोई नहीं करता मना,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

एक ‘प्याली’ इसकी पीते ही सुकून आ जाए,
घर हो, बाजार या ऑफिस-दुकान, हर जगह मिल जाए।
चाय व्यवहारिक जीवन में आपसी तालमेल बढ़ाए,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

चाय मानो इस युग का ‘अमृत’ बन गई,
जिसे पीना चाहता है हर कोई।
जाति-वर्ण, अमीरी-गरीबी सब भूलकर एक साथ पीते हैं इसे,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

सुबह उठते ही इसे न पिएं, तो सब कुछ अधूरा लगता है।
दोपहर में नहीं मिले, तो सिर चकराने लगता है।
शाम को घर पर ‘परिजनों’ के साथ इसे पीते ही मन प्रसन्न हो जाता है,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…॥

मौलिक व अप्रकाशित रचना
लेखक : हरिहर सिंह चौहान
जबरी बाग नसिया, इंदौर (मध्य प्रदेश)

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