नवीन सी. चतुर्वेदी
घुटरू का है रयौ है? आज तौ प्रâी दीखै है तू! कछू काम वाम नांय नें का जो बैठें-बैठें जम्हाई लै रयौ है! आउ भेंन बत्तो, बैठ। हां आज कछू खास काम वाम है नांय सो यों ही बैठें-बैठें तराजू तौल रयौ हों मतबल टाइमपास कर रयौ हों। अब अपनी तेरी जैसी आदत तौ है नांय कि पूछौ न पूछौ बत्तो बोलवे कों हरदम तैयार।
घुटरू मोय समझ में नांय आवै तुम जैसे लोग’न कों कैसें हू चैन नांय परै। अगर मैं जादा बोलों तौ कहौ कि बत्तो भौत बोलता है गयी है, अगर मैं कम बोलों तौ बोलौ कि मैं टेंड़कीबाज है गयी हों और अगर मैं पॉइंट टू पॉइंट बात करवे लगों तौ तुम ही लोग मोय स्वार्थी, मतलबी, खुदगर्ज, सेल्फिस और न जानें वैâसे-वैâसे नाम’न सों नवाजवे लगौ हौ। अब तू ही बताय मैं करों तौ का करों? छोड़ भेंन बत्तो, सेंटी क्यों है रही है; और बताय का खबर सुन आयी?
घुटरू खबर तौ यै सुनी है कि चीन के बनाए भए रोबोट, खिलौना जैसे बन कें रह गये हैं, आदमी’न वारे काम है नांय रहे विन सों।
बत्तो, आज खुद्द आदमी ही जब आदमी’न वारे काम नांय कर रहे, ऐसे में रोबोट’न सों उम्मीद का रखनी? बल्कि आज के इंसान कों देखौ तौ वौ खुद्द ही रोबोट बनों भयौ है! मशीनी जीवन जी रह्यौ है। कभू-कभू तौ ऐसौ लगै है कि दुनिया एक घड़ी के समान है। और वाकी जो तीन सूई हैं नें वे आज के समाज कों रिप्रेजेंट कर रही होंय। घण्टा वारी सूई तौ गरीब’न जैसी लगै है जो सबसों कम स्पीड सों चल रही है। मिनट वारी सूई मिडिल क्लास की तरह चल रही है एकदम धीरें-धीरें और सैकिंड वारी सूई डिट्टो अमीर’न की तरें है, भाजती ही जाय रही है, भाजती ही जाय रही है, बस भाजती ही जाय रही है। अभी देखी तौ यहां हुती और नैंक पलक झपकी कि वहां पहोंच गयी। मगर बत्तो एक बात नांय भूलनी चैंयें कि खरगोस कितनी हू तेजी सों भाज लेय, रेस तौ कछुआ ही जीतते रहे हैं
उसे हलके में तुम ले तो रहे हो
वो कछुआ है, चलेगा धीरे-धीरे
