मुख्यपृष्ठस्तंभमहाराष्ट्रनामा : ‘होर्डिंग हटेंगे या केवल एलईडी बुझेंगी?'

महाराष्ट्रनामा : ‘होर्डिंग हटेंगे या केवल एलईडी बुझेंगी?’

राजन पारकर

सड़क पर खड़ा खतरा बरसों तक दिखाई नहीं देता। लेकिन विधानसभा में सवाल उठते ही अचानक एलईडी की रोशनी सरकार की आंखों में चुभने लगती है। अब एलईडी बंद होंगी… क्यूआर कोड लगेंगे, लाइसेंस रद्द होंगे। अरे साहब! जनता यह नहीं पूछ रही कि होर्डिंग पर क्यूआर कोड है या नहीं। जनता यह पूछ रही है कि अगर कल वह होर्डिंग गिर गया, तो उसके नीचे कौन दबेगा—क्यूआर कोड या आम आदमी? हमारे यहां हर हादसे के बाद कार्रवाई ऐसे शुरू होती है, जैसे डॉक्टर अंतिम संस्कार के बाद दवा लिख रहा हो।
‘सरकार का नया महामंत्र समिति बनाओ, योजना सुनाओ, जनता को बहलाओ!’
‘सरकार का पूरा तंत्र अब घोषणाओं के उद्योग में बदल चुका है। कहीं होर्डिंग पर क्यूआर कोड चिपकाया जा रहा है, कहीं सूअरों को उद्योगपति बनाया जा रहा है, तो कहीं दूध में मिलावट रोकने के लिए फिर वही पुराना भाषण उबाला जा रहा है।’ ‘जनता को सुरक्षा चाहिए—सरकार उसे क्यूआर कोड दे रही है। जनता को रोजगार चाहिए—सरकार उसे सूअर दे रही है। जनता को शुद्ध दूध चाहिए—सरकार उसे शुद्ध आश्वासन पिला रही है।’
‘दूध में मिलावट पर सरकार का शुद्ध भाषण!’
हर साल वही घोषणा—मिलावट पर सख्त कार्रवाई होगी। नई लैब बनेगी, अधिकारी भर्ती होंगे, कानून और कठोर होगा। लेकिन बाजार में दूध से ज्यादा पानी और भाषणों में दूध से ज्यादा मिठास मिलती है। सरकार कहती है कि कानून मजबूत करेंगे।जनता कहती है—पहले कानून लागू तो कीजिए! क्योंकि इस देश में मिलावट केवल दूध में नहीं, वादों में भी सबसे ज्यादा होती है। आज की राजनीति का नया सूत्र यही है—
‘समस्या पुरानी रखो, घोषणा नई करो। योजना बड़ी बनाओ, परिणाम भगवान पर छोड़ दो!’ और फिर कहो—‘सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है!’ यही आज के शासन की सबसे बड़ी विडंबना और सबसे तीखा व्यंग्य है।
‘अब सूअर भी बनेंगे उद्योगपति!’
सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है—सूअर पालन को औद्योगिक दर्जा मिलेगा। लगता है, अब गांवों में बेरोजगारी नहीं, बल्कि ‘सूअर स्टार्टअप’ का नया युग आने वाला है। दो लाख रुपए की सहायता, सब्सिडी, ब्याज में छूट, बिजली में रियायत, किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिले या न मिले, लेकिन सूअरों का भविष्य अब उज्ज्वल घोषित कर दिया गया है। जनता पूछ रही है—क्या इंसानों की जिंदगी सुधारने के सारे रास्ते बंद हो गए थे, जो अब सरकार को सूअरों में विकास दिखाई देने लगा?

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