मुख्यपृष्ठस्तंभउड़न छू: विनोद राय से चंपत राय तक

उड़न छू: विनोद राय से चंपत राय तक

अजय भट्टाचार्य

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की तिजोरियों को २०११ में खोला गया तो भारी मात्रा में सोना, आभूषण और बहुमूल्य धरोहर मिलने का खुलासा हुआ। इसके बाद मंदिर के प्रबंधन, संपत्तियों के संरक्षण और लेखा-व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चला। इसी प्रक्रिया के बाद २०१४ में पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) विनोद राय को मंदिर की संपत्तियों और खातों का विशेष ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सौंपी। उस समय मंदिर प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न उठे थे। विनोद राय को खातों, संपत्तियों और वित्तीय रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन हुआ क्या यह सार्वजनिक नहीं है। २०१४–२०१६ के ऑडिट के दौरान जब रिकॉर्ड, स्टॉक और खातों का मिलान किया गया, तब मीडिया में खबरें आईं कि कुछ सोने और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड में अंतर है। कुछ रपटों में लगभग २६६ किलोग्राम सोने का हिसाब न मिलने जैसी बातें भी प्रकाशित हुईं। जब विनोद राय यह सब कर रहे थे तभी अयोध्या के राम मंदिर की व्यवस्था हुई। मंदिर के धन की सुरक्षा के लिए उनसे सलाह ली गई कि नहीं, मालूम नहीं २०१६ में खबर आई थी कि ऑडिट के दौरान सैकड़ों स्वर्ण पात्रों के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। इन खबरों के बाद बड़ा विवाद खड़ा हुआ जैसा अब अयोध्या में है। २०२० में सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के निर्णय ने त्रावणकोर राजपरिवार के ‘शेबैत’ (परंपरागत संरक्षक) अधिकारों को मान्यता दी। साथ ही मंदिर के संचालन के लिए प्रशासनिक समिति और सलाहकार समिति की व्यवस्था जारी रखी गई। १८वीं शताब्दी में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने अपने पूरे राज्य को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया था और खुद को देवता का `दास’ (सेवक) घोषित किया था। सबके बाद भी अदालत ने पहले से आदेशित २५ वर्षों के ऑडिट को पूरा करने पर जोर दिया। २०२१ में जब मंदिर ट्रस्ट ने इस ऑडिट से छूट मांगी तो सुप्रीम कोर्ट ने उसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि ऑडिट यथाशीघ्र पूरा किया जाए। जो अभी तक नहीं हुआ।
वर्तमान में मंदिर का प्रशासन निर्धारित संस्थागत व्यवस्था के तहत चल रहा है। २०२२ में विनोद राय को कल्याण ज्वेलर्स ने अपना स्वतंत्र गैरकार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया। कंपनी ने कहा कि उनकी पहचान कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और सार्वजनिक वित्तीय प्रशासन के अनुभव के कारण की गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (राम मंदिर ट्रस्ट) के गठन के बाद भारत सरकार ने चंपत राय को १९ फरवरी २०२० को ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया था। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा एक और ट्रस्ट है, पीएम केयर्स फंड। इसके पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री हैं। सरकार समर्थकों और प्रचारकों की मानिए तो कोई घोटाला नहीं है, कोई भ्रष्टाचार नहीं है जो है वह २जी और कोयला घोटाला ही था।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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