-२,५४५ परियोजनाएं पूरी, पर २.२ लाख परिवार आज भी घर के इंतजार में
जेदवी / मुंबई
आर्थिक राजधानी मुंबई में झुग्गी पुनर्विकास (एसआरए) और क्लस्टर पुनर्विकास योजनाओं को शहर की आवासीय समस्या का सबसे बड़ा समाधान बताकर वर्षों से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। पुनर्विकास की चमकदार तस्वीर के पीछे हजारों परिवारों की पीड़ा, अनिश्चितता और वर्षों का इंतजार छिपा हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह पुनर्विकास मॉडल आखिर आम नागरिकों के लिए है या केवल बिल्डरों के फायदे का माध्यम बनकर रह गया है। वर्ष १९९५ में शुरू हुई एसआरए योजना के तहत अब तक २,५४५ पुनर्विकास परियोजनाएं पूरी होने और लगभग २.८३ लाख झुग्गी परिवारों के पुनर्वास का दावा किया जा रहा है। इनमें से करीब ५०० परियोजनाएं पिछले पांच वर्षों में पूरी हुई हैं। जबकि दूसरी ओर सैकड़ों परियोजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं। ऐसे में हजारों परिवारों का जीवन अस्थायी ठिकानों व अनिश्चित भविष्य के बीच फंसकर रह गया है। स्थिति इतनी खराब हो गई कि राज्य सरकार को वर्ष २०२५ में बंद पड़ी ८६ एसआरए परियोजनाओं के लिए नए डेवलपर नियुक्त करने का निर्णय लेना पड़ा। इन परियोजनाओं से जुड़े हजारों परिवार वर्षों से किराये के मकानों और ट्रांजिट वैंâपों में रहने को मजबूर हैं।
