मुख्यपृष्ठस्तंभकानून है, फिर नेटवर्क कैसे सक्रिय?.. गांव के सारे हिंदुओं को बनाया...

कानून है, फिर नेटवर्क कैसे सक्रिय?.. गांव के सारे हिंदुओं को बनाया जा रहा था ईसाई!

-धर्मांतरण के आरोपों के बीच सरकार के दावों पर सवाल

मुजफ्फरनगर स्थित मंसूरपुर थाना क्षेत्र के जड़ौदा गांव में कथित रूप से प्रलोभन देकर लोगों का ईसाई धर्म में परिवर्तन कराने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने १४ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सात पुरुषों और पांच महिलाओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की सूचना है। पुलिस को मौके से तीन बाइबल, कुछ पहचान पत्र और अन्य सामग्री मिली है। इन वस्तुओं का कथित अवैध धर्मांतरण से क्या संबंध है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
२०० लोगों को दिया लालच
बजरंग दल के जिला संयोजक रवि चौधरी की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोप लगाया गया है कि रशीद नामक व्यक्ति के गोदाम में करीब २०० लोगों को एकत्र किया गया था। लोगों को मुफ्त उपचार, ५० से ६० हजार रुपये की आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, २०२१ की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
१६ लोगों की जांच शुरू
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कुछ लोगों को प्रलोभन दिए जाने की बात सामने आई है और १६ व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि साक्ष्यों, कथित पीड़ितों के स्वतंत्र बयानों और वित्तीय लेन-देन की जांच से ही होगी।
स्वेच्छा या दबाव है कारण
हर घटना के बाद गिरफ्तारी और कठोर कार्रवाई का दावा करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को संभावित वित्तपोषण, आयोजकों के संपर्क, बैंक खातों और कथित लाभार्थियों के बयानों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि स्वेच्छा से धर्म अपनाने वाले नागरिकों और प्रलोभन, दबाव या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों में स्पष्ट अंतर किया जाए।
भाजपा के दावों की विफलता
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि गरीब और बीमार लोगों की मजबूरी का शोषण होगा। और यदि इतने बड़े कथित आयोजन की जानकारी प्रशासन को नहीं थी, तो यह भाजपा सरकार के कठोर कानून-व्यवस्था के दावों की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
भाजपा सरकार पर प्रश्नचिन्ह
यह प्रकरण भाजपा सरकार के लिए असहज प्रश्न खड़ा करता है। सरकार पिछले कई वर्षों से स्वयं को धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने वाली सरकार के रूप में प्रस्तुत करती रही है और इसके लिए विशेष कानून भी बनाया गया। इसके बावजूद यदि किसी गांव में खुले गोदाम में सैकड़ों लोगों को बुलाकर संगठित गतिविधि चल रही थी, तो स्थानीय पुलिस, खुफिया इकाई और प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?

अन्य समाचार