मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात :

अंदर की बात :

राजन पारकर

एक ही दिन में सैकड़ों पेड़ों के गिरने की घटना ने मनपा और संबंधित विभागों की नींद उड़ा दी है। चर्चा है कि प्री-मानसून तैयारियों की फाइलें फिर से खोली जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, अब सवाल यह नहीं कि पेड़ क्यों गिरे, बल्कि यह है कि जिम्मेदारी किस पर गिरेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर समीक्षा हो सकती है। मनपा के गलियारों में यह भी कानाफूसी है कि ‘ट्री ऑडिट’ की फाइलें अब उतनी ही तेजी से खोजी जा रही हैं, जितनी तेजी से बारिश में पेड़ गिरे थे।
बारिश में पानी कम, बहे दावे, फाइलें और सियासी चेहरे ज्यादा!
बारिश ने मुंबई को रोक दिया, लेकिन मंत्रालय की फाइलों की रफ्तार अचानक तेज हो गई। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों को आधे दिन की छुट्टी और निजी कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह केवल मौसम का फैसला नहीं, बल्कि हालात बिगड़ने से पहले नुकसान नियंत्रित करने की कोशिश भी मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी है कि अगर हालात और बिगड़ते, तो सवाल सिर्फ बारिश पर नहीं, तैयारी पर भी उठते। चर्चा है कि कुछ विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। बंद कमरों में यह भी फुसफुसाहट है कि ‘रेड अलर्ट’ अब मौसम तक सीमित नहीं, कुछ अधिकारियों के लिए भी ‘रेड सिग्नल’ बन सकता है।
मिसिंग लिंक से ज्यादा…नेताओं की ‘लिंक’ चर्चा में!
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक अब इंजीनियरिंग परियोजना कम और राजनीतिक अखाड़ा ज्यादा बनती दिखाई दे रही है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा है कि स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक आते ही विकास परियोजनाओं का हिसाब-किताब भी चुनावी मंच पर रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने में जुटे हैं। कानाफूसी है कि कुछ नेताओं की टिकट की दावेदारी अब उनके बयानों और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता पर भी निर्भर करेगी। जो कल तक उद्घाटन का श्रेय ले रहे थे, उन्हें अब जवाबदेही के सवालों का भी सामना करना पड़ सकता है। ‘मुंबई में बारिश ने सड़कें धो दीं, लेकिन राजनीति ने हाथ नहीं धोए। इधर पेड़ गिरे, उधर बयान उगे। जनता नाव ढूंढ रही है और नेता मुद्दा। फर्क सिर्फ इतना है कि पानी उतरने का समय तय है… लेकिन जिम्मेदारी कब सामने आएगी, इसका मौसम विभाग भी अनुमान नहीं लगा सकता!’ बारिश ने सरकार की तैयारी, मनपा की व्यवस्था और राजनीतिक दावों की एक साथ परीक्षा ले ली है। मंत्रालय में जवाबदेही, मनपा में समीक्षा और राजनीतिक दलों में चुनावी गणित को लेकर अंदरखाने हलचल तेज होने की चर्चा है।

अन्य समाचार