-जलभराव, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त ट्रैक
-पौने घंटे की देरी से चली लोकल
-वसई के आगे थमी रफ्तार
-२० से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें फंसीं, १० रद्द
-लाखों यात्री दिनभर रहे परेशान
जेदवी / मुंबई
मुंबई और आस-पास के इलाकों में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने रेलवे प्रशासन की मानसून पूर्व तैयारियों की पूरी कलई खोल दी। हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर मानसून से निपटने के दावों की हकीकत पहली ही तेज बारिश में सामने आ गई। वेस्टर्न और सेंट्रल रेलवे की सेवाएं पूरे दिन चरमराई रहीं। कहीं ट्रैक पानी में डूब गए तो कहीं भूस्खलन और पटरियों के क्षतिग्रस्त होने से रेल परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। आधे से पौने घंटे की देरी से चल रही ट्रेनों ने लाखों यात्रियों को घंटों स्टेशन और डिब्बों में फंसे रहने पर मजबूर कर दिया।
वसई रोड, विरार और नालासोपारा के बीच रेलवे ट्रैक पर भारी जलभराव होने से वेस्टर्न रेलवे की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुर्इं। चर्चगेट से वसई तक सीमित सेवाएं संचालित की गर्इं, जबकि वसई के आगे स्थिति बेहद गंभीर बनी रही। रेलवे की एडवाइजरी के अनुसार, लगभग एक घंटे में केवल एक ट्रेन चलाई जा रही थी। रेलवे ने स्वीकार किया कि ट्रैक का स्तर आस-पास के जलस्तर बराबर होने के कारण पंपों से भी पानी निकालना संभव नहीं हो पा रहा है। मुंबई-अमदाबाद रेलमार्ग पर २० से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें रास्ते में फंस गर्इं और १० ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। कई ट्रेनों के मार्ग भी बदले गए।
भूस्खलन ने तोड़ा मुंबई-पुणे रेल संपर्क
भोर घाट के ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल के पास कई स्थानों पर भूस्खलन होने से मुंबई-पुणे रेल मार्ग पूरी तरह ठप हो गया। डेक्कन क्वीन, सिंहगढ़ और इंद्रायणी एक्सप्रेस समेत कई प्रमुख ट्रेनों को रद्द या शॉर्ट-टर्मिनेट करना पड़ा। हजारों यात्रियों की यात्रा बीच रास्ते में ही अटक गई।
स्टेशनों पर अफरातफरी
ट्रेनों के रद्द होने और लगातार देरी के कारण मुंबई के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों लोग घंटों प्लेटफॉर्म पर फंसे रहे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोकल ट्रेन के डिब्बों की छत से पानी टपकता दिखाई दिया, जहां यात्री छाता खोलकर सफर करने को मजबूर थे। इस तस्वीर ने रेलवे के रख-रखाव और मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सेंट्रल रेलवे भी हुई बेपटरी
सेंट्रल रेलवे की मुख्य और हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेनें ३० से ४५ मिनट की देरी से चलती रहीं। कर्जत-खोपोली सेक्शन में ट्रैक के नीचे की गिट्टी बह जाने से रेल सेवा बाधित हो गई। तुर्भे और कोपरखैरणे के बीच पटरियों के नीचे की मिट्टी और गिट्टी बहने से २४ लोकल ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। मरम्मत के बाद भी ट्रेनों को महज १० से ३० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया।
