सामना संवाददाता / मुंबई
महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षकों, कर्मचारियों और किसानों की लंबित मांगों को लेकर लगातार घिर रही भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार अब एक बार फिर अपनी प्राथमिकताओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार विधायकों के निजी सहायकों और वाहन चालकों के मानदेय में बढ़ोतरी की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
विधान परिषद में संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील ने जानकारी दी कि विधायकों के पीए और वाहन चालकों के मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर पीए का मासिक मानदेय ३० हजार रुपए से बढ़ाकर ४० हजार रुपए और वाहन चालकों का मानदेय २० हजार रुपए से बढ़ाकर ३० हजार रुपए कर दिया जाएगा। यह मुद्दा भाजपा सदस्य प्रवीण दरेकर ने उठाते हुए कहा कि कई वर्षों से मानदेय में वृद्धि नहीं हुई है इसलिए इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इस मांग को सदन में विभिन्न दलों के सदस्यों का समर्थन भी मिला। इस पैâसले ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक ओर शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सेविकाएं आदि अपनी मांगों को लेकर महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, वहीं सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में उदासीन बनी हुई है।
-कोरोना काल के देवदूतों की ‘महायुति राज’ में पिटाई!
-शिवसेना सहित कांग्रेस ने सीएम को घेरा
महाराष्ट्र में शिंदे गुट के एक नगरसेवक पर महिला डॉक्टर और नर्सों के साथ कथित मारपीट का आरोप लगने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस घटना को लेकर महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस संबंध में शिवसेना और कांग्रेस ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को ‘सफेद पोशाक वाले देवदूत’ कहकर सम्मानित किया गया था, आज महायुति राज में उनकी सरेआम पिटाई हो रही है।
बता दें कि एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मामला ज्यादा बिगड़ने पर डॉक्टरों ने बच्चे को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया। शिंदे गुट के नाराज नगरसेवक म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और धक्का-मुक्की की। इस घटना को लेकर विपक्ष ने महायुति सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शिवसेना विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि इस मामले में कहा कि महायुति नेताओं को सत्ता का घमंड है, जिसके चलते वे किसी पर भी हाथ उठा रहे हैं। जब डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम मरीजों की सुरक्षा की क्या गारंटी है? कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए इस घटना को निंदनीय बताया है।
