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महायुति राज में भ्रष्टाचार ही ‘शिष्टाचार’…पहली बारिश में ही बह गया कुंभ का पुल!..  नासिक-त्र्यंबकेश्वर का संपर्क टूटा…गुणवत्ता के सरकारी दावों पर बड़ा सवाल

सुनील ओसवाल / मुंबई

सिंहस्थ कुंभ २०२७ की तैयारियों को लेकर सरकार के गुणवत्ता संबंधी दावों पर पहली ही बड़ी बारिश ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नासिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग पर पिंपलगांव बहुला के पास निर्माणाधीन नया पुल नंदिनी नदी में आई बाढ़ के तेज बहाव में बह गया, जिससे नासिक और त्र्यंबकेश्वर का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया। घटना के बाद कुंभ परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों की निगरानी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल के दिनों में कई बार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कुंभ परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कुंभ मामलों के प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन भी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। लेकिन पहली ही भारी बारिश में निर्माणाधीन पुल के बह जाने से इन दावों पर विपक्ष और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। घटना ऐसे समय हुई है, जब दो दिन पहले ही विधान परिषद में शिवसेना विधायक अनिल परब ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के कुंभ परियोजना से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताओं और संभावित घोटाले का मुद्दा उठाया था। अब पुल बहने की घटना ने उस बहस को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। हालांकि, पुल बहने के कारणों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।
जलमग्न हुआ शहर
लगातार हुई मूसलाधार बारिश से नासिक और त्र्यंबकेश्वर शहर जलमग्न हो गए। गोदावरी और नंदिनी नदियां उफान पर हैं। कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन ठप हो गया। प्रशासन को स्कूल बंद रखने पड़े और निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई। नासिक शहर के सिडको, सातपुर, पाथर्डी, दाढ़ेगांव, अंबड लिंक रोड और गंगापुर रोड सहित कई प्रमुख इलाके पानी में डूब गए। गोदावरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और दुतोंड्या मारुति मंदिर तक पानी पहुंच गया।

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