उमा सिंह
कुर्सी पर बैठकर शिकायतें सुनना आसान है, लेकिन जमीन पर उतरकर हकीकत देखना हर किसी के बस की बात नहीं। कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने कुछ ऐसा ही किया, जब वह बिना किसी तामझाम के आम यात्री बनकर बंगलुरु की बीएमटीसी बसों में सफर करने निकल पड़े।
रात के समय मंत्री ने करीब दो घंटे तक १० से ज्यादा बसों में यात्रियों के बीच बैठकर सफर किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि कागजों में चलने वाली व्यवस्था और जमीन की हकीकत में कितना फर्क है। मंत्री को खुद भी सिस्टम की खामी का सामना करना पड़ा। बताया गया कि हेब्बाल से नागाशेट्टीहल्ली रूट पर सफर के दौरान उन्होंने किराए के लिए १०० रुपए का नोट दिया, लेकिन कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने की बात कहकर उन्हें बस से उतरने को कह दिया। आम यात्री की तरह मंत्री ने भी इस व्यवहार को महसूस किया। इतना ही नहीं, निरीक्षण के दौरान एक बस में यात्रियों की शिकायतों और लापरवाही के मामले सामने आए। आरोप है कि एक यात्री के उतरने का संकेत देने के बावजूद बस स्टॉप पर बस नहीं रोकी गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को निलंबित करने का आदेश दे दिया। इसके बाद मंत्री ने एक ऑटो चालक से भी सामना किया, जहां किराया मीटर से ज्यादा पैसे लेने की शिकायत पर उन्होंने हस्तक्षेप किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है, अगर हर अधिकारी और नेता कभी-कभी आम आदमी बनकर व्यवस्था को देखे, तो शायद कई समस्याएं कुर्सी तक पहुंचने से पहले ही पकड़ में आ जाएं। क्योंकि असली रिपोर्ट फाइलों में नहीं, जनता के अनुभवों में छिपी होती है।
