-कुर्सी बचाने कोर्ट पहुंचे,मुझे बचाओ सरकार!
सामना संवाददाता / मुंबई
पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लगातार सोशल मीडिया पर निशाने पर हैं। ई-२० र्इंधन को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से वाहनों के इंजन और माइलेज पर असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर नितिन गडकरी को जमकर ट्रोल भी किया जा रहा है।
इसी बीच यह दावा भी तेजी से वायरल हो रहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब अगला नंबर नितिन गडकरी का हो सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का आरोप है कि गडकरी अपने परिवार से जुड़ी कंपनी के हितों के लिए इथेनॉल का प्रचार कर रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वे सड़क परिवहन मंत्रालय का दायित्व संभालने के बावजूद वाहन और पेट्रोलियम से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे आम जनता की मेहनत की कमाई से खरीदे गए वाहन प्रभावित हो रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बीच उनके इस्ताफे या उन्हें पद से हटाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर चल रहे कथित दुष्प्रचार से राहत पाने के लिए गडकरी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने भी उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई की अनुमति दी है।
बताया जा रहा है कि युवाओं ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर नई मुहिम छेड़ दी है। ई-२० ईंधन को लेकर चल रही बहस के बीच नितिन गडकरी पर यह आरोप भी लगाया गया कि वे अपने परिवार से जुड़े इथेनॉल कारोबार को लाभ पहुंचाने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का समर्थन कर रहे हैं। इन आरोपों के आधार पर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट, वीडियो और दावे प्रसारित किए जा रहे हैं।
