मुख्यपृष्ठस्तंभE२० पर ‘जेन-जी विस्फोट’ की आहट

E२० पर ‘जेन-जी विस्फोट’ की आहट

गडकरी के खिलाफ खुल सकता है नया मोर्चा

-‘आप’ ने पीएम आवास तक मार्च का किया एलान; जंतर-मंतर से लौटते युवाओं का तंज, ‘अंकल जी बाय, नितिन गडकरी के टाइम फिर मिलेंगे’
नीट पेपर लीक आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब जेन-जी के अगले बड़े आंदोलन की जमीन E२० पेट्रोल के मुद्दे पर तैयार होती दिखाई दे रही है। नीट आंदोलन की कामयाबी से उत्साहित युवाओं और विपक्षी दलों ने अब एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति को लेकर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को घेरना शुरू कर दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने २५ जुलाई को इस्तीफा दिया और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
इस बीच आम आदमी पार्टी ने E२० पेट्रोल के खिलाफ बड़े आंदोलन का एलान करते हुए प्रधानमंत्री आवास तक मार्च की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने वाहन मालिकों को कोई व्यावहारिक विकल्प दिए बिना E२० पेट्रोल थोप दिया है। यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती या सामान्य पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध नहीं कराती, तो विरोध को देशव्यापी रूप दिया जाएगा। अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय भी मांगा है और E२० पेट्रोल की कीमत घटाने की मांग उठाई है।
E२० का अर्थ ऐसा पेट्रोल है, जिसमें २० प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। विरोध करने वाले वाहन मालिकों का आरोप है कि पुराने और गैर-E२० अनुकूल वाहनों में इसके इस्तेमाल से माइलेज घट सकता है तथा इंजन, फ्यूल पाइप और रबर के पुर्जों पर असर पड़ने की आशंका है। आंदोलनकारी सवाल कर रहे हैं कि जब उपभोक्ता ने पूरी कीमत देकर वाहन खरीदा है, तब उसे अपनी गाड़ी के अनुकूल ईंधन चुनने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए?
इसी दरम्यान जंतर-मंतर से लौट रहे युवा प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसमें कुछ युवा दिल्ली पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई देते हैं, ‘अंकल जी बाय, नितिन गडकरी के टाइम मिलेंगे वापस। अगली बार बंदूक लेकर आना, लट्ठ से काम नहीं चलेगा।’ वीडियो की यह पंक्ति सोशल मीडिया पर कई खातों ने साझा की है, हालांकि इसके मूल स्रोत और पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
यह कथन किसी वास्तविक हथियारबंद कार्रवाई का आह्वान कम और पुलिस की कथित लाठीबाजी पर तीखा व्यंग्य अधिक दिखाई देता है। फिर भी ऐसे शब्दों को सनसनीखेज या हिंसक धमकी के रूप में पेश करने के बजाय पूरे संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए। युवाओं का मूल संदेश साफ है, नीट आंदोलन समाप्त हुआ है, लेकिन सरकार की नीतियों से नाराजगी समाप्त नहीं हुई है।
नीट आंदोलन से निकली युवा ऊर्जा अब शिक्षा के दायरे से बाहर निकलकर पेट्रोल, महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता अधिकार जैसे मुद्दों की तरफ बढ़ रही है। मुंबई के कुछ छात्र संगठनों ने भी आंदोलन के बाद E२० नीति को अगला बड़ा मुद्दा बताते हुए व्यापक गठबंधन बनाने की बात कही है। इसी आंदोलन से प्रेरित होकर ‘E२० जनता पार्टी’ नाम से ऑनलाइन अभियान शुरू होने और नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग उठने की खबरें भी सामने आई हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जेन-जी को यह भरोसा दे चुका है कि लगातार, रचनात्मक और संगठित जनदबाव सत्ता को झुकने पर मजबूर कर सकता है। इसलिए E२० का विवाद केवल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा तक सीमित नहीं रहने वाला। यह उपभोक्ता की पसंद, पुराने वाहनों की सुरक्षा, माइलेज में कथित कमी, पेट्रोल की कीमत और सरकार की जवाबदेही का संयुक्त सवाल बन सकता है।
सरकार ने समय रहते संवाद नहीं किया, स्वतंत्र तकनीकी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए और वाहन मालिकों को ईंधन चुनने का विकल्प नहीं दिया, तो जंतर-मंतर पर विदाई के समय बोला गया युवाओं का वाक्य सच भी साबित हो सकता है, अगली मुलाकात नितिन गडकरी के मुद्दे पर होगी।

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