मुख्यपृष्ठनए समाचार‘बेस्ट' बोले तो ‘वर्स्ट'!.. मुंबईकरों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक?

‘बेस्ट’ बोले तो ‘वर्स्ट’!.. मुंबईकरों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक?

-मानखुर्द हादसे ने खोली बदहाल बस व्यवस्था की पोल
-वेट-लीज मॉडल, खराब मेंटेनेंस और मुआवजे की देरी पर उठे सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली बेस्ट बस सेवा अब यात्रियों के लिए सुविधा से ज्यादा चिंता और खतरे का कारण बनती जा रही है। मानखुर्द फ्लाईओवर पर हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था, निजी ठेकेदारों की जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों का एक ही सवाल है कि ‘क्या केवल बेस्ट बस से सफर करना ही हमारी सबसे बड़ी गलती थी।’
इस दुर्घटना में घायल हुए अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूर, घरेलू सहायिकाएं और छोटे कारोबार से जुड़े नागरिक हैं। परिवार के कमाने वाले सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं या गंभीर रूप से घायल होने के कारण काम पर नहीं जा पा रहे। नतीजतन कई परिवारों की आय पूरी तरह बंद हो गई है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के दावों के बावजूद दवाइयों, जांच, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और आने-जाने के खर्च ने पीड़ितों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, बेस्ट प्रशासन की ओर से मुआवजे का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन जटिल प्रक्रिया और देरी के कारण जरूरतमंद परिवारों तक राहत समय पर नहीं पहुंच पा रही है।
हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह निजी ऑपरेटरों की वेट-लीज बसों की बदहाल तकनीकी स्थिति बताई जा रही है। हालिया जांचों में कई बसों में ब्रेक और स्टीयरिंग सिस्टम में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं।
लापरवाहों पर कार्रवाई की मांग
मानखुर्द हादसे ने बेस्ट बस सेवा की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेट-लीज बसों की तकनीकी खामियां, कमजोर निगरानी और मुआवजे में देरी से पीड़ित परिवार परेशान हैं। यात्रियों की मांग है कि बसों का सुरक्षा ऑडिट हो और लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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