-‘तुरुप के इक्के’ को बेंच पर बैठाए रखना चयन समिति की कौन-सी नीति
-क्यों तोड़ा जा रहा है टीम के ‘सूर्यवंशी’ का आत्मविश्वास?
भारतीय क्रिकेट टीम के चयन को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आईपीएल २०२६ में ७७६ रन बनाकर अपनी प्रतिभा साबित करने वाले वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में चुना गया, लेकिन बार-बार अंतिम एकादश से बाहर रखा गया। यदि चयनकर्ताओं को उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं था, तो उन्हें टीम में शामिल ही क्यों किया गया? आयरलैंड के खिलाफ हार के बाद भी टीम संयोजन नहीं बदला गया और वैभव को मौका नहीं मिला। इंग्लैंड के खिलाफ पदार्पण के बाद सिर्फ तीन मैचों में उन्हें बाहर कर देना भी समझ से परे है। किसी १५ वर्षीय खिलाड़ी का भविष्य दो-तीन पारियों से तय नहीं किया जा सकता। पूर्व क्रिकेटर एल. शिवरामकृष्णन भी वैभव को भारतीय क्रिकेट का दीर्घकालिक निवेश बता चुके हैं। चयन में दोहरे मापदंड भी सवाल खड़े करते हैं। यदि आईपीएल प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, तो वैभव को लगातार अवसर क्यों नहीं? युवा प्रतिभा को बेंच पर बैठाकर उसका आत्मविश्वास बढ़ाया नहीं जा सकता। टीम प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि वैभव को बाहर रखने का क्रिकेटीय कारण क्या है। प्रतिभा को केवल टीम में चुन लेना काफी नहीं, उसे मैदान पर लगातार अवसर देना भी उतना ही जरूरी है। वरना भविष्य के सितारे तैयार होने से पहले ही खो सकते हैं।
