मुख्यपृष्ठनए समाचारदाऊद ने छोड़ा अबू सलेम का साथ...नहीं मिली १७ लाख की मदद!

दाऊद ने छोड़ा अबू सलेम का साथ…नहीं मिली १७ लाख की मदद!

-जुर्माना न भरने पर सलेम को होगी १८ साल की अतिरिक्त कैद

फिरोज खान / मुंबई

१९९३ मुंबई ब्लास्ट केस के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सलेम ने कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने की रकम नहीं भरी तो उसे और १८ साल जेल में काटने होंगे। सबसे बड़ी बात ये है कि इस मुश्किल घड़ी में उसके आका दाऊद इब्राहिम ने भी उसका साथ छोड़ दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सलेम ने अपने साथियों के जरिए दाऊद से १७ लाख रुपए की मदद मांगी थी, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। कहा जा रहा है कि दाऊद ने अबू सलेम की मदद करना पूरी तरह बंद कर दिया है। इस हफ्ते मुंबई कोर्ट में यह मुद्दा उठा कि सलेम को जुर्माने की १६.५१ लाख रुपए की रकम देनी होगी या नहीं। अगर वह यह रकम नहीं भरता है तो उसे १८ साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
सलेम अभी नासिक सेंट्रल जेल में बंद है। वह दो अलग-अलग मामलों में उम्रवैâद की सजा काट रहा है। पहला मामला १९९३ के मुंबई सीरियल ब्लास्ट का है और दूसरा बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड का। इन दोनों मामलों में स्पेशल कोर्ट ने उसे २०१७ और २०१५ में दोषी ठहराया था। टाडा कोर्ट ने सलेम पर एक मामले में ८ लाख और दूसरे में ८.५१ लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। जुर्माना न भरने पर उसे ८ साल और १० साल ६ महीने की अतिरिक्त सजा हो सकती है। दोनों मिलाकर १८ साल बनते हैं।
सलेम की आर्थिक तंगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फरवरी २०२६ में अपने बड़े भाई के निधन के बाद वह आजमगढ़ जाना चाहता था। मुंबई हाई कोर्ट ने उसे १४ दिन की इमरजेंसी पैरोल दी थी, लेकिन भारी पुलिस एस्कॉर्ट का खर्च न दे पाने के कारण उसकी याचिका खारिज हो गई।
वकील ने भी केस लड़ने से किया इनकार
भाई की मौत के समय भी उसने दाऊद से पैसे मांगे थे, लेकिन मदद नहीं मिली। यहां तक कि फीस न देने पर सलेम की वकील ने भी केस लड़ने से मना कर दिया था। सलेम को ११ नवंबर २००५ को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत ने पुर्तगाल को भरोसा दिलाया था कि उसे मौत या २५ साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी।

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