-३७ फ्लैट खरीददारों के पैसे डूबे
-७.२४ करोड़ के हाउसिंग घोटाले से मचा हड़कंप
सामना संवाददाता / मुंबई
मीरा रोड में ७.२४ करोड़ रुपए के हाउसिंग घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिल्डर शंकर झा पर ३७ फ्लैट खरीदारों से पैसे लेकर फ्लैट न देने और रकम की हेराफेरी का आरोप है। मामले के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। सभी पीड़ित खरीदारों ने कनकिया पुलिस स्टेशन में बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकर झा ने ठाणे सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सबसे अहम बात यह है कि आरोपी बिल्डर ने हाल ही में मीरा-भायंदर मनपा चुनाव में शिंदे गुट की तरफ से चुनाव लड़ा था।
यह है पूरा मामला
झा पर ‘एरिस्टोन बिल्डर – द हाइड पार्क’ प्रोजेक्ट के ३७ खरीदारों से वसूली गई ७.२४ करोड़ रुपए से अधिक की हेराफेरी का आरोप है। एफआईआर के अनुसार, झा ने खरीदारों से बुकिंग की रकम ली, लेकिन उसे प्रोजेक्ट के रेरा के निर्धारित खाते में जमा नहीं किया। बड़ी रकम सीधे अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। कई खरीदारों से बिना रसीद दिए नकद भी वसूला गया।
कोर्ट ने क्या कहा?
९ जुलाई २०२६ को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी. बी. माने ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है। जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। मध्यस्थता की कार्यवाही चलने से आपराधिक मुकदमा नहीं रोका जा सकता। प्रथम दृष्टया सबूत हैं कि प्रोजेक्ट के पैसे डायवर्ट किए गए। आरोपी ने रेरा रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल अपने दूसरे कारोबार ‘झा रियल्टी’ के लिए भी किया। पीड़ित सिर्फ बिजनेस पार्टनर नहीं, आम फ्लैट खरीदार भी हैं, जिनका निवेश दांव पर है।
बचाव पक्ष की दलील नाकाम
बचाव पक्ष ने इसे ‘सिविल मामला’ बताते हुए कहा कि एरिस्टोन बिल्डर के पार्टनर्स के बीच हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ के सामने कार्यवाही चल रही है। झा ने अन्य पार्टनरों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत भी की थी।
विश्वासघात का स्पष्ट मामला
लेकिन अभियोजन ने कहा कि यह धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का स्पष्ट मामला है। कई खरीदारों के बयान दर्ज हैं, जिनमें बिना रसीद भुगतान की बात कही गई है। पुलिस को रकम के लेन-देन और दस्तावेज बरामद करने के लिए हिरासत में पूछताछ करनी है।
बिल्डर की जमानत याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है और मामले की विस्तृत जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। पीड़ित सिर्फ बिजनेस पार्टनर नहीं हैं, बल्कि कई फ्लैट खरीदार भी हैं जिनका निवेश दांव पर लगा है। मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
