मुख्यपृष्ठस्तंभदो नावें किनारे रुकीं, तीसरी को मौत के समंदर में किसने उतारा?

दो नावें किनारे रुकीं, तीसरी को मौत के समंदर में किसने उतारा?

-वियतनाम नौका हादसे में १५ भारतीयों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल;

-कप्तान हिरासत में, दो घायलों की हालत नाजुक

वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास स्पीडबोट पलटने से १५ भारतीय पर्यटकों की मौत के बाद अब पूरा मामला केवल समुद्री दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा है। हादसे से पहले मौसम की चेतावनी, नाव को यात्रा की अनुमति, यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना के बाद चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वियतनामी पुलिस ने स्पीडबोट के ५७ वर्षीय कप्तान न्गुयेन होंग हाई को हिरासत में लेकर जलमार्ग सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन की जांच शुरू कर दी है। हादसे में बचाए गए २१ लोगों में से दो भारतीय पर्यटकों की हालत गंभीर बताई गई है। अन्य जीवित यात्रियों को भारत वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
दो नावें रुकीं तो पहली क्यों निकली?
एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, भारतीय पर्यटकों के समूह के लिए तीन नावों की व्यवस्था की गई थी। समुद्र में ऊंची लहरों और खराब मौसम के कारण दो नावें कथित रूप से किनारे पर ही रुकी रहीं, लेकिन यात्रियों से भरी पहली स्पीडबोट द्वीप से रवाना हो गई। नाव अभी तट से करीब ४०० मीटर ही दूर पहुंची थी कि तीन मीटर तक ऊंची बताई जा रही लहरों और तेज हवा के बीच कुछ ही सेकंड में पलट गई। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मौसम इतना खराब था कि दूसरी नौकाएं रवाना नहीं हुर्इं, तब दुर्घटनाग्रस्त नाव को समुद्र में उतरने की अनुमति किसने दी?
भीतर फंस गए यात्री
हादसे में जीवित बचे भारतीय यात्री निर्मल कुमार ने बताया कि नाव अचानक पलट गई और कई यात्रियों को बाहर निकलने का अवसर तक नहीं मिला। कुछ लोग पलटी हुई नाव के बंद हिस्से में फंस गए थे। समुद्र में गिरे यात्री सहायता के लिए चीख रहे थे, जबकि आसपास की पर्यटक नौकाओं और जेट स्की से पहुंचे लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। बचाव नौकाएं जल्द मौके पर पहुंचीं, लेकिन खराब समुद्री परिस्थितियों के कारण अभियान कठिन हो गया। मृतकों में १३ पुरुष और दो महिलाएं शामिल बताई गई हैं।
बचाव हुआ, इलाज में हुई देरी?
जीवित बचे यात्री ने आरोप लगाया है कि दुर्घटनास्थल के निकट स्थित द्वीप पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। घायल यात्रियों को तत्काल आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। उसका दावा है कि बेहतर आपात चिकित्सा व्यवस्था होती तो शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं। फिलहाल, यह पीड़ित यात्री का आरोप है और वियतनामी अधिकारियों ने चिकित्सा सहायता में लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिर भी जांच में यह देखा जाना आवश्यक होगा कि हादसे के बाद डॉक्टर, एंबुलेंस, ऑक्सीजन और जीवनरक्षक उपकरण कितनी देर में उपलब्ध कराए गए।
शवों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
भारतीय दूतावास ने मृतकों के पार्थिव शरीर भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हनोई और हो ची मिन्ह सिटी में स्थापित नियंत्रण कक्ष पीड़ित परिवारों को जानकारी और सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। जीवित बचे यात्रियों की स्वदेश वापसी तथा अस्पताल में भर्ती घायलों के उपचार के लिए भी स्थानीय अधिकारियों से संपर्क रखा जा रहा है।
सैर पर गए थे लावा कंपनी से जुड़े लोग
नाव में सवार अधिकांश भारतीय मोबाइल फोन कंपनी लावा इंटरनेशनल के कर्मचारी, वितरक और कारोबारी सहयोगी बताए गए हैं। वे कंपनी की ओर से आयोजित सामूहिक यात्रा पर वियतनाम गए थे। मृतकों में १० तमिलनाडु, तीन आंध्र प्रदेश और दो केरल के बताए गए हैं। कंपनी ने अपने कर्मचारियों और सहयोगियों की मौत पर शोक जताते हुए उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। तमिलनाडु और अन्य संबंधित राज्यों के अधिकारियों ने भी विदेश मंत्रालय तथा वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय शुरू कर दिया है।

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