उमेश गुप्ता / वाराणसी
धान की बुआई के इस मुख्य सीजन में खाद की भारी किल्लत ने वाराणसी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों की कमर तोड़ दी है। चोचचकपुर सहित पूरे कंदास क्षेत्र में डीएपी (DAP), यूरिया और पोटाश जैसी जरूरी खादों की भारी कमी के कारण अब किसानों का धैर्य जवाब दे गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर नाराज किसानों, छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों और समाजवादी पार्टी के नेताओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा।
खाद संकट के खिलाफ सपा नेता हरीश मिश्रा (बनारस वाले मिश्रा जी) के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और किसानों ने अनोखा प्रदर्शन किया। हाथ में फरसा लिए और बेहद सामान्य (दीनहीन) वेशभूषा में पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को संबोधित एक ज्ञापन सिगरा थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा को सौंपा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने खाद की कथित कालाबाजारी और सीमा पार तस्करी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया कि क्षेत्र की अधिकांश सरकारी और सहकारी समितियों पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे समय में जब धान की रोपाई और बुआई के लिए किसानों को सबसे ज्यादा खाद की जरूरत है, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। खाद न मिलने से बेबस किसान सुबह से शाम तक दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, निजी दुकानदारों और बिचौलियों द्वारा खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर औने-पौने दामों (ऊंची कीमतों) पर खाद बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए सीधा आरोप लगाया कि इस संकट के पीछे खाद तस्करों, दलालों और विभागीय अधिकारियों का एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री अनिल यादव, पूर्व अध्यक्ष संदीप यादव सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। किसान नेताओं ने जिला प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर खाद की किल्लत दूर नहीं हुई और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो किसान वाराणसी में बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।
