मुख्यपृष्ठस्तंभपॉलिटिकल गॉसिप : दिल्ली की दौड़, दुश्मनी मोल...!

पॉलिटिकल गॉसिप : दिल्ली की दौड़, दुश्मनी मोल…!

उत्तर प्रदेश: नंबर वन की कुर्सी!

यूपी की सियासत में पारा हमेशा हाई रहता है। इन दिनों चर्चा है कि बाबा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत करोड़ों पौधे रोपकर पर्यावरण ही नहीं, अपना सियासी कद भी हरा-भरा कर रहे हैं। फुसफुसाहट है कि इस ‘ऑक्सीजन’ से २०२७ की राह आसान होगी या दिल्ली दरबार में नंबर वन की कुर्सी! अब बाबा को कौन समझाए कि ऐसे सपने देखकर दुश्मनी मोल ले रहे हैं…!
उत्तराखंड: तार कहां तक जुड़े हैं…!
देवभूमि में मानसून की बौछारों के बीच आईएएस अफसर अचानक फाइलों की धूल झाड़कर जमीन पर उतर आए हैं। नेताओं में गॉसिप है कि अगर बाबू ही सारा काम फटाफट कर देंगे तो हम चुनाव में क्रेडिट का नारियल कहां फोड़ेंगे? उधर, केदारनाथ उप-चुनाव को लेकर नेताजी अपनी-अपनी सियासी छतरी चमकाने में जुटे हैं। लेकिन तकलीफ है कि बद्रीनाथ केदारनाथ में होनेवाले चढ़ावे की चोरी की! इस पर कोई खुलकर नहीं कहना चाहता…कि तार कहां तक जुड़े हैं…!
बिहार: कदम क्यों वापस लिए…?
बिहार में जैसे ही उपचुनाव का बिगुल बजा, नेताओं का ‘मौसम’ बदल गया। चाय की टपरियों पर शर्त लग रही है कि इस बार कौन-सा ‘माननीय’ पाला बदलकर पावन गंगा में डुबकी लगाएगा। गठबंधन की इस खिचड़ी में कौन-सा चावल पकेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन नेताओं के दिल की धड़कनें जरूर बढ़ गई हैं। लेकिन सबसे बड़ी खोजी न्यूज है कि भाजपा के
मध्य प्रदेश: माया मिली न राम…!
एमपी में ३० जुलाई को होनेवाले दतिया उप चुनाव ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रखा है। असली मजा उन बागियों को देखने में आ रहा है, जो कोर्ट-कचहरी और पार्टी के बीच त्रिशंकु बने लटके हैं। गॉसिप है कि कइयों को ‘माया मिली न राम’ का डर सता रहा है।
राजस्थान: तकलीफ है, होती रहेगी…
रेगिस्तान की हवा में इस वक्त समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की गर्मी घुली हुई है। लेकिन असली गॉसिप तो दोनों प्रमुख पार्टियों के अंदरूनी गुटों को लेकर है, जो मॉनसून की आड़ में एक-दूसरे के अभेद्य किलों में ‘डिजिटल सेंधमारी’ करने के जुगाड़ में जुटे हैं, वहीं बड़े साहेब ने कह दिया कि नयी रिफाइनरी से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, प्रदेश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था में भी रिफाइनरी का बड़ा योगदान होगा। इसलिए तकलीफ है, होती रहेगी।

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