राजन पारकर
दिल्ली की हवा जब भी महाराष्ट्र की ओर बहती है, मुंबई के सत्ता गलियारों में कुर्सियों के पायों की आवाज तेज होने लगती है। राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जितने दावेदार बाहर दिखाई दे रहे हैं, उससे कहीं अधिक अंदर कतार में खड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, एक नेता दिल्ली जाकर लौटता है तो समर्थक उसे भावी मुख्यमंत्री घोषित कर देते हैं। दूसरे नेता का नाम किसी सांसद की जुबान पर आता है तो तीसरा नेता खुद को सबसे योग्य साबित करने में लग जाता है। अब तो हाल यह है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से ज्यादा दावेदार हैं और कुर्सी केवल एक। चर्चा है कि यह पूरा नामों का खेल असली लड़ाई से ज्यादा राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार है। कोई दिल्ली का आशीर्वाद गिना रहा है, कोई नागपुर का समीकरण और कोई संगठन की निष्ठा। यह मुख्यमंत्री की दौड़ नहीं, बल्कि इच्छुकों की बारात है, फर्क सिर्फ इतना है कि दूल्हा कौन बनेगा।
कुर्सी, कंपनी और करोड़ों की चाल…महाराष्ट्र की सत्ता, व्यवस्था और सितारों के गलियारों में तीन बड़ी कानाफूसी!
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर नई-नई अटकलें हैं। उधर, प्रशासन में खाद्य सुरक्षा पर अचानक सख्ती ने कई बड़ी कंपनियों की नींद उड़ा दी है और मुंबई में एक सुपरस्टार की लगातार प्रॉपर्टी बिक्री ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन घटनाएं अलग हैं, लेकिन तीनों के पीछे सत्ता, रणनीति और संकेतों की राजनीति साफ दिखाई दे रही है।
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प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर अब केवल दिखावटी कार्रवाई का दौर समाप्त हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में लगातार मिल रही शिकायतों ने केंद्र और राज्य दोनों एजेंसियों को एक्शन मोड में ला दिया है। राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि अब बड़ी कंपनियों के नाम सार्वजनिक करने की रणनीति अपनाई जा रही है ताकि केवल जुर्माना भरकर मामला रफा-दफा न हो सके। कानाफूसी है कि आने वाले दिनों में कई और ई-कॉमर्स तथा क्विक डिलिवरी प्लेटफॉर्म जांच के दायरे में आ सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह कार्रवाई केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन सकती है। पहले जनता को सड़ा सामान भेजो, फिर रिफंड देकर खुद को ईमानदार बताओ, यह व्यापार नहीं, ग्राहक की जेब और सेहत दोनों के साथ मजाक है। अब नोटिस पहुंची है, तो बहाने भी एक्सप्रेस डिलिवरी से ही आएंगे!
सलमान का फ्लैट बिका, सिर्फ प्रॉपर्टी डील या कोई बड़ी रणनीति?
मुंबई के रियल एस्टेट और फिल्मी गलियारों में चर्चा है कि बड़े सितारे कभी भी बिना कारण अपनी संपत्तियों का पुनर्गठन नहीं करते। सूत्रों के अनुसार, लगातार दूसरी बार प्रॉपर्टी बिक्री ने बाजार में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। कोई इसे निवेश की नई रणनीति बता रहा है, तो कोई भविष्य की वित्तीय योजना। कुछ जानकार इसे केवल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट मान रहे हैं। लेकिन कानाफूसी यह भी है कि जब सुपरस्टार कोई कदम उठाता है तो उसके पीछे सिर्फ र्इंट और सीमेंट का हिसाब नहीं होता। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मुंबई में आम आदमी घर खरीदने का सपना बेचता है और सितारे घर बेचकर करोड़ों का सपना खरीद लेते हैं। फर्फ सिर्फ बैंक बैलेंस का नहीं, किस्मत और बाजार का भी है। महाराष्ट्र की राजनीति में कुर्सी की चर्चा, प्रशासन में सख्ती और मुंबई में करोड़ों की प्रॉपर्टी, तीनों खबरें अलग-अलग दिखाई देती हैं, लेकिन अंदर की बात यही है कि हर मोर्चे पर असली खेल पर्दे के पीछे चल रहा है। जनता को दिखाई देती है सिर्फ घोषणा, नोटिस या रजिस्ट्री, लेकिन पैâसलों की पटकथा बंद कमरों में ही लिखी जाती है।
