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ऑनलाइन जालसाजी से मुंबईकर बेहाल

-२४ घंटे में १४ लोग ऑनलाइन ठगी के शिकार

-हाउसवाइफ, डॉक्टर, नर्स, सरकारी कर्मचारी और कारोबारी बने निशाना

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में साइबर अपराधियों के सामने साइबर पुलिस बेबस नजर आ रही है। पिछले २४ घंटे के भीतर ऑनलाइन ठगी के १४ अलग-अलग मामले दर्ज होने से हड़कंप मच गया है। भोईवाडा पुलिस ने एक ही दिन में दर्ज इन मामलों से साफ संकेत मिला है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इन मामलों में हाउसवाइफ, डॉक्टर, नर्स, सरकारी कर्मचारी, कारोबारी और निजी क्षेत्र के पेशेवरों को निशाना बनाया गया। ठगों ने नकली कस्टमर केयर नंबर, एपीके फाइल, फर्जी केवाईसी अपडेट, नकली सर्विस प्रोवाइडर और फर्जी पहचान जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया।
एक मामले में पार्सल नहीं मिलने पर ब्लिंकिट का कस्टमर केयर नंबर गूगल पर खोजने वाली एक महिला नकली हेल्पलाइन के जाल में फंस गई। आरोपियों ने डिलीवरी पते में गड़बड़ी का बहाना बनाकर उसे व्हॉट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी। फाइल इंस्टॉल करते ही उसके बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक के खातों से एक लाख रुपये निकाल लिए गए।
एक २७ वर्षीय गृहिणी पुराना फर्नीचर ऑनलाइन बेचने के दौरान ९५ हजार रुपए की ठगी का शिकार हो गई। आरोपी ने भुगतान का झांसा देकर उससे बैंक संबंधी जानकारी हासिल कर ली। केईएम अस्पताल में कार्यरत एक नर्स से भी ९५ हजार रुपये की ठगी हुई। उसे वेतन संबंधी लॉगिन अपडेट करने के नाम पर एक संदेश भेजा गया था। एक कपड़ा व्यापारी गूगल पर सर्विस खोजते समय फर्जी विज्ञापन पर क्लिक कर बैठा, जिसके बाद उसके खाते से ९३ हजार रुपये निकल गए।
वहीं, हैफकाइन बायो फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन के एक कर्मचारी से २ लाख रुपए और दूसरे कर्मचारी से १.९८ लाख रुपए की ठगी कर ली गई। दोनों ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी लेनदेन को मंजूरी नहीं दी थी, फिर भी उनके खातों से रकम निकाल ली गई। पुलिस ने सभी मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नकली लिंक से खाली हो रहे खाते
सायबर ठग नकली कस्टमर केयर नंबर, एपीके फाइल, फर्जी केवाईसी अपडेट, व्हाट्सएप लिंक और गूगल पर फर्जी विज्ञापनों के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से किसी भी अनजान लिंक या ऐप पर भरोसा न करने की अपील की है।

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