मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान: अ‍ेक जिद्दी छोरी

रौबीलो राजस्थान: अ‍ेक जिद्दी छोरी

बुलाकी शर्मा / राजस्थान

-‘हेलो लवली दादी मां। पांय लागूं छूं।’

‘अरे बेबली अबार तूं कठै सैं बोल री छै। कोटा सैं वैâ जादूगारै जंतर-मंतर छूं? भोत चिंत्या होयरी छै।’ ‘जंतर-मंतर को काम फिनिस, पाछी कोटा आयगी छूं पण आज आप आसीरवाद ना दियो दादी मां।’ ‘म्हाकी लाडो‌ को हर पल-छिण आसीरवाद ई देंवती रैवूं छूं बेटा। पढ़-लिखवैâ डाक्टर बणो। चोखो घर-वर मिलै।’ ‘घर-वर को आसीरवाद अबार पैंडिंग राखो। फर्स्ट नंबर वैâरियर देन घर अ‍ेंड वर।’
‘हेंअ‍े तूं तो अपणी दोस्त को जनम दिन मनावण वास्तै दिल्ली जावण को वैâयो छो अर पूगगी जंतर-मंतर…’
‘बठै को कहती तो ना आप परमिशन देता, ना मम्मा-डेड‌। सॉरी दादी मां। ‘‌तेरै मम्मी-पापा को वैâई बार पूछ्यो। बे बोल्या, सब ठीक छै। लड्डू गोपाल आपणी दीदी का वीडियो दिखाया जणै पतो चाल्यो वैâ तू अपणी पैंâड वैâ साथ बैनर हाथ में लियां जंतर-मंतर पै धरणो देय री छै।’
‘देश का हजारूं स्टूडेंट्स जद म्हांवैâ हकां सारू बठै आंदोलन कर रैया छा जणै म्हावैâ मन में ई हूंस जागगी छी दादी मां।’ ‘पण बेटा तू हालै टाबर छै…’ ‘टाबर कठै छूं दीदी मां। टाबर होती तो घर सैं सैकड़ूं किलोमीटर दूर कोटा में अ‍ेकली‌ दो सालां सैं नीट की त्यारी कियां कर री छूं? सही-गलत की म्हनैं समझ छै।’ ‘भलो-बुरो समझण की हालै तेरै में पूरी समझ‌ कोन्या छै। अबकी तो लफ़ड़ै में पड़गी, आगै सैं ध्यान राखजै बेबी बेटा।’ ‘लफड़ो कियां दादी मां? गलत को विरोध अर सही को पख लेबा की सीख आप दीवी छै। स्टूडेंट्स वैâ साथै बरसां सैं अन्याव हो रैयो छो। सह रैया छा। अबकी सब खुलनै प्रोटेस्ट करियो जणै म्हांकी बात मानीजी छै दादी मां।’
‘अरे बेटा, थूं ना जाती तो ई बठै धरणो चालतो अर थावैâ गया बिना ई मांग्यां मानीजती वैâ नीं, बता?’ ‘सैंग ई इयां सोचबा लागता जणा प्रोटेस्ट में बठै कोई पूगतो ई कोन्या दादी मां। ‌आप ई बतायो छो वैâ आपांवैâ घर में लुगायां वैâ घूंघट काढण वैâ रिवाज नैं पैलपोत आप ई तोड्यो छो। ब्यांव होबा पछै ई आगै की पढ़ाई करनैं बीअ‍े करी छी। दादो सा, बां का बापू जी अर मां सा त्यार कोनी छा। आप जिद करनै खुद की बात‌ मनवाई छी। म्हूं आपकी ई पोती छूं दीदी मां।’ ‘भोत जिद्दी छै तूं बेटा।’ ‘आपसूं ई सीख्यो छै खरी बात मनावण वास्तै जिद्द करणो।’ ‘भगवान थाकी मनोकामना पूरण करै बेटा।’

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