अजय भट्टाचार्य
लोकतंत्र में सरकार से प्रश्न पूछना या सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं होता है। हमारे बुजुर्ग कहते थे कि कोई प्रश्न मूर्खतापूर्ण नहीं होता, क्योंकि मूर्ख कभी प्रश्न नहीं पूछते। जंतर-मंतर पर एकत्रित छात्रों का मन परीक्षा व्यवस्था को लेकर खट्टा था। छात्रों ने सरकार के दांत खट्टे कर दिए। छात्रों के लिए तारे तोड़कर लाने का वादा करने वाली सरकार को छात्रों ने दिन में तारे दिखा दिए। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा साधारण नहीं हैं, यह असाधारण सरकार की असाधारण हार का प्रतीक है। सरकार हमेशा झुके हुए शरीर को पसंद करती है, तन कर खड़े सिर को नहीं। जब सबने सरकार के सामने आंखें झुका ली थी, तब छात्रों ने सरकार के आंखों में आंखें डालकर जंतर-मंतर पर डेरा डाला और नतीजा यह है कि एक मंत्री को सरकार ने छूमंतर कर दिया। भारत का संविधान लिखने वाली सभा ने अध्यक्षीय लोकतंत्र की तुलना में संसदीय लोकतंत्र को चुना, तो उसके पीछे यहीं मंशा थी कि देश की जनता को सत्ता के सबसे बड़े हाकिम से भी सवाल पूछने की छूट मिले। सरकार से सवाल पूछते रहिए वरना सरकार आवारा हो जाएगी।
एक लीक और ..!
जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर धरना-प्रदर्शन और संसद कूच जैसे आयोजन चल रहे थे तब उत्तराखंड में एक और पेपर लीक हो गया था। उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के दो पेपर कथित तौर पर लीक हो गए। इसके बाद उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने दोनों विषयों की परीक्षा रद्द कर दी। इस लीक कांड का आरोपी शिक्षक आशीष कुमार शिवालिक कॉलेज में प्रोफेसर है और पेपर सेटर के रूप में प्रश्नपत्र तैयार करने का काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि उसने परीक्षा से मिलते-जुलते सवाल एक कॉलेज के व्हॉट्सऐप ग्रुप में छात्रों को भेजे, इसके बाद दोनों पेपर रद्द कर दिए गए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
एक और आंदोलन चाहती है सरकार
एक तरफ महामानव ने अपने मंत्रियों से इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय रहने को कहा है दूसरी तरफ खबर है कि आईआईटी मद्रास ने छात्रों को छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाने वाले इंस्टाग्राम पोस्ट और वीडियो हटाने का फरमान जारी किया है। जंतर-मंतर आंदोलन, सोनम वांगचुक और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में बैनर पकड़े हुए छात्रों का वीडियो वायरल होने के बाद डीन ने यह फरमान जारी किया। दिल्ली विश्व विद्यालय पहले ही अपने छात्रों को हड़का चुका है। लगता है एक और छात्र आंदोलन चाहती है सरकार।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)
